छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, अनुकंपा नियुक्ति, compassionate appointment, विधवा को नौकरी, अनुकंपा नियुक्ति नियम, हाई कोर्ट का फैसला, छत्तीसगढ़ न्यूज
अनुकंपा नियुक्ति पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: दो विधवाओं को बड़ी राहत, तकनीकी आधार पर आवेदन खारिज करना गलत
रायपुर। दिवंगत शिक्षाकर्मियों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला लिया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति (compassionate appointment rules)से जुड़े दो अहम मामलों में पीड़ित विधवाओं को बड़ी राहत दी है। अदालत ने वर्षों पहले उनके अनुकंपा नियुक्ति आवेदनों को खारिज करने वाले प्रशासनिक आदेशों को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की वर्तमान शैक्षणिक योग्यता के आधार पर पात्र पद पर तत्काल अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए।
अनुकंपा नियुक्ति 2026 : सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृत सरकारी कर्मचारी के आश्रित को उसी पद पर नियुक्त करना नहीं, बल्कि परिवार को अचानक आई आर्थिक कठिनाई से राहत देना है। ऐसे मामलों में केवल तकनीकी या यांत्रिक आधार पर पात्र आश्रित को नियुक्ति से वंचित करना उचित नहीं है।
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला : रायगढ़ की संध्या सिदार को 10 साल बाद मिली राहत
पहला मामला रायगढ़ जिले के लैलूंगा निवासी संध्या सिदार से जुड़ा है। उनके पति राधे लाल सिदार शिक्षक (पंचायत) के पद पर कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान 22 जून 2013 को उनका निधन हो गया था।
पति की मृत्यु के बाद संध्या सिदार ने 25 मार्च 2014 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। हालांकि, अधिकारियों ने 18 जुलाई 2014 को उनका आवेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि चतुर्थ श्रेणी के ‘भृत्य’ पद पर नियुक्ति को लेकर स्पष्ट निर्देश उपलब्ध नहीं हैं।
याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि राज्य सरकार ने 3 नवंबर 2011 को ‘शिक्षा कर्मी’ पदनाम को बदलकर ‘शिक्षक (पंचायत)’ कर दिया था। इसके बावजूद पुराने पदनाम के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन खारिज कर दिया गया।
जशपुर की पुष्पावती सिदार का मामला भी पहुंचा हाई कोर्ट
दूसरा मामला जशपुर जिले के पत्थलगांव की निवासी पुष्पावती सिदार का है। उनके पति तेश्वर सिंह सिदार शिक्षक (पंचायत) के पद पर कार्यरत थे और 6 जुलाई 2013 को सेवाकाल में उनका निधन हो गया था।
पति की मृत्यु के बाद पुष्पावती ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। उस समय उनकी शैक्षणिक योग्यता 11वीं पास थी। अधिकारियों ने उन्हें तीन साल के भीतर 12वीं पास करने की शर्त बताई। पुष्पावती ने इस शर्त को पूरा करते हुए 12वीं की परीक्षा पास कर ली।
इसके बाद उनके सामने D.Ed/B.Ed और TET जैसी नई शर्तें रख दी गईं। उन्होंने चतुर्थ श्रेणी के पद पर काम करने की इच्छा भी जताई, लेकिन इसके बावजूद 28 जून 2016 को उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि शिक्षा कर्मी के आश्रित को केवल शिक्षा कर्मी ग्रेड-3 के पद पर ही नियुक्ति दी जा सकती है।
बार-बार नई शर्तें लगाना उचित नहीं- हाई कोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देखा। अदालत ने कहा कि यदि किसी पीड़ित आश्रित को अधिकारियों के निर्देश पर अपनी शैक्षणिक योग्यता बढ़ाने के लिए कहा जाता है और वह ऐसा करता भी है, तो उसके बाद बार-बार नई और अव्यावहारिक शर्तें लगाकर नियुक्ति से वंचित करना उचित नहीं है।जस्टिस सचिन सिंह राजपूत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति की योजना को उसके सामाजिक और कल्याणकारी उद्देश्य को ध्यान में रखकर लागू किया जाना चाहिए।
अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य क्या है?
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में अनुकंपा नियुक्ति के मूल उद्देश्य को भी स्पष्ट किया। अदालत के अनुसार इसका उद्देश्य मृत कर्मचारी के आश्रित को अनिवार्य रूप से वही पद उपलब्ध कराना नहीं है, जिस पर मृत कर्मचारी कार्यरत था।
इस योजना का मूल उद्देश्य ऐसे परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से बचाना है, जिसने कमाने वाले सदस्य को सेवाकाल के दौरान खो दिया है।ऐसे में यदि कोई आश्रित उपलब्ध नियमों के तहत किसी पद के लिए पात्र है और नियुक्ति के लिए तैयार है, तो केवल तकनीकी आधारों या पुराने प्रशासनिक आदेशों का हवाला देकर उसे राहत से वंचित करना उचित नहीं माना जा सकता।
छत्तीसगढ़ अनुकंपा नियुक्ति: पुराने निरस्तीकरण आदेश हाई कोर्ट ने किए रद्द
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दोनों मामलों में संबंधित प्रशासनिक आदेशों को निरस्त कर दिया। संध्या सिदार के मामले में 18 जुलाई 2014 और पुष्पावती सिदार के मामले में 28 जून 2016 को जारी किए गए निरस्तीकरण आदेशों को अदालत ने अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया।कोर्ट ने संबंधित जिला पंचायत, जनपद पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दोनों याचिकाकर्ताओं की वर्तमान शैक्षणिक योग्यता (अनुकंपा नियुक्ति में शैक्षणिक योग्यता) के आधार पर जिस पद के लिए वे पात्र हैं, उस पद पर उन्हें अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
अनुकंपा नियुक्ति हाई कोर्ट : तकनीकी आधार पर राहत रोकना गलत
इस फैसले से यह संदेश स्पष्ट है कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में प्रशासनिक प्रक्रिया को केवल तकनीकी और यांत्रिक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता। पात्र आश्रित की परिस्थितियों, उसकी वर्तमान योग्यता और योजना के वास्तविक उद्देश्य को ध्यान में रखना होगा।हाई कोर्ट के इस फैसले से वर्षों से अनुकंपा नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे आश्रितों के लिए भी राहत की उम्मीद बढ़ी है।
अनुकंपा नियुक्ति के नियम : अनुकंपा नियुक्ति क्या होती है?
अनुकंपा नियुक्ति ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत सेवाकाल के दौरान सरकारी कर्मचारी की मृत्यु होने पर पात्र आश्रित को परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकारी सेवा में नियुक्ति दी जाती है। इसका उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से राहत देना है।
compassionate appointment latest news : क्या अनुकंपा नियुक्ति के लिए वही पद मिलना जरूरी है?
हाई कोर्ट के इस फैसले से महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य आश्रित को मृत कर्मचारी के समान पद देना नहीं है। पात्रता और वर्तमान शैक्षणिक योग्यता के आधार पर उपलब्ध उपयुक्त पद पर नियुक्ति दी जा सकती है।
क्या तकनीकी कारण से अनुकंपा नियुक्ति खारिज की जा सकती है?
इस मामले में हाई कोर्ट ने माना कि केवल तकनीकी या यांत्रिक आधार पर पात्र आश्रित को राहत से वंचित करना उचित नहीं है। खासकर तब, जब आवेदक ने अधिकारियों के निर्देश के अनुसार अपनी शैक्षणिक योग्यता भी पूरी कर ली हो।
विधवा को अनुकंपा नियुक्ति पर हाई कोर्ट का क्या आदेश है?
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दोनों मामलों में पुराने निरस्तीकरण आदेशों को रद्द करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की वर्तमान शैक्षणिक योग्यता के अनुसार पात्र पद पर तत्काल अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
पूछे जाने वाले सवाल
Q. अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार को अचानक उत्पन्न आर्थिक संकट से तत्काल राहत देना।
Q. क्या अनुकंपा नियुक्ति में मृत कर्मचारी का वही पद मिलता है?
A. जरूरी नहीं। पात्रता और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर उपयुक्त पद पर नियुक्ति दी जा सकती है।
Q. क्या तकनीकी कारणों से अनुकंपा नियुक्ति रोकी जा सकती है?
A. हाई कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट किया कि केवल तकनीकी या यांत्रिक आधार पर पात्र आश्रित को राहत से वंचित करना उचित नहीं है।
Q. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दोनों मामलों में क्या आदेश दिया?
A. पुराने निरस्तीकरण आदेश रद्द करते हुए वर्तमान शैक्षणिक योग्यता के आधार पर पात्र पद पर तत्काल नियुक्ति देने का निर्देश दिया।
Q. किन लोगों को इस फैसले से राहत मिल सकती है?
A. इस फैसले से उन पात्र आश्रितों के मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी आधार मिल सकता है, जिनके आवेदन केवल तकनीकी या प्रक्रियात्मक आधारों पर खारिज किए गए हों।


















