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डायालिसिस खर्च भी हेल्थ इंश्योरेंस में कवर, बिलासपुर उपभोक्ता फोरम का फैसला; 5.31 लाख चुकाने का आदेश

बिलासपुर उपभोक्ता फोरम ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि डायालिसिस खर्च भी हेल्थ इंश्योरेंस के दायरे में आएगा। बीमा कंपनी को ₹5.31 लाख, 9% ब्याज, ₹25 हजार मानसिक क्षतिपूर्ति और ₹10 हजार वाद व्यय देने का आदेश दिया गया।

July 30, 2026 5:06 AM
कोर्ट ने उपभोक्ता प्रकरण में सुनाया फैसला
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किडनी मरीज का क्लेम खारिज करना पड़ा महंगा, 9% ब्याज के साथ भुगतान, मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय देने के भी निर्देश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (उपभोक्ता फोरम) ने हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बीमा कंपनी के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। अपने आदेश में फोरम ने स्पष्ट किया कि किडनी मरीज के डायालिसिस का खर्च भी हेल्थ इंश्योरेंस के दायरे में आएगा और बिना उचित आधार के क्लेम खारिज करना सेवा में कमी (Deficiency in Service) माना जाएगा। उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को पीड़ित उपभोक्ता को ₹5.31 लाख की बीमा राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया है। ये भुगतान उसे 45 दिन के भीतर करना होगा।

किडनी मरीज को मिली बड़ी राहत

दरअसल ये पूरा मामला एक ऐसे किडनी मरीज से जुड़ा है, जिसने इलाज के दौरान हुए डायालिसिस खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के पास दावा प्रस्तुत किया था। लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम अस्वीकार कर दिया कि मरीज पहले से किडनी की बीमारी से पीड़ित था और यह पॉलिसी के दायरे में नहीं आता।मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और इसे अनुचित माना। कोर्ट ने माना कि कंपनी का इनकार उसकी सेवा में कमी का प्रतीक है।

बीमा कंपनी पर फोरम सख्त

फोरम ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज करना उपभोक्ता के साथ सेवा में कमी का मामला है। इसलिए कंपनी को बीमा राशि के अलावा अन्य मदों में भी भुगतान करना होगा। फोरम ने बीमा कंपनी को निर्देश दिए हैं कि वह—

  • ₹5.31 लाख की बीमा राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित अदा करे।
  • ₹25,000 मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में दे।
  • ₹10,000 वाद व्यय (Litigation Cost) भी अलग से भुगतान करे।

45 दिनों में करना होगा भुगतान

उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर पूरी राशि का भुगतान करे। आदेश का पालन नहीं करने पर कंपनी को आगे भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ये फैसला काफी महत्वपूर्ण है।

हेल्थ इंश्योरेंस मामलों में अहम फैसला

उपभोक्ता फोरम का यह फैसला हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे उन मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके इलाज संबंधी दावों को बीमा कंपनियां विभिन्न आधारों पर अस्वीकार कर देती हैं।

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