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कर्मचारियों के नियमितीकरण पर हाई कोर्ट का बड़ा निर्देश, 3 महीने में लेना होगा फैसला

बिलासपुर नगर निगम कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है। कमिश्नर को अभ्यावेदन पर 3 महीने में नियमानुसार फैसला लेने को कहा।

August 17, 2026 5:45 AM
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बिलासपुर। कर्मचारियों के नियमितिकरण पर हाईकोर्ट ने अहम निर्देश दिया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने सरकार को इस मामले पर तीन महीने के भीतर फैसला लेने को कहा है। ये मामला नगर निगम बिलासपुर में कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़ा है। जिनकी नियमितिकरण की याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने सक्षम प्राधिकारी को कर्मचारियों की ओर से पहले से प्रस्तुत अभ्यावेदन पर नियमानुसार विचार कर तीन महीने के भीतर तार्किक निर्णय लेने का निर्देश दिया है।यह आदेश जागेश्वर दुबे व अन्य की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान जारी किया गया। हालांकि, हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावे पर सीधे कोई फैसला नहीं सुनाया है। कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को नियमों और शासन के निर्देशों के आधार पर अभ्यावेदन का निराकरण करने को कहा है।

नगर निगम के इन कर्मचारियों ने उठाई नियमितीकरण की मांग

याचिका दायर करने वालों में नगर निगम बिलासपुर में कार्यरत माली जागेश्वर दुबे, इलेक्ट्रीशियन चंद्र कुमार नागदौने, टाइम कीपर मिर्जा वाहिद बेग और माली पेट्रिक पास्टी शामिल हैं।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उनकी सेवाओं का नियमितीकरण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने इसे मनमाना बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के उल्लंघन का भी आधार बनाया।कर्मचारियों ने सामान्य प्रशासन विभाग के 5 मार्च 2008 के परिपत्र का हवाला देते हुए अपने से समान और कनिष्ठ कर्मचारियों की तरह नियमितीकरण का लाभ दिए जाने की मांग की थी।

कमिश्नर के पास पहले ही दिया था अभ्यावेदन

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने अपनी मांग को लेकर नगर निगम बिलासपुर के कमिश्नर के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था। हालांकि काफी समय बीत जाने के बाद भी उस अभ्यावेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद कर्मचारियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान उन्होंने अपनी मूल मांग को सीमित करते हुए कोर्ट से केवल इतना निर्देश देने का आग्रह किया कि सक्षम प्राधिकारी उनके लंबित अभ्यावेदन पर नियमों के अनुसार विचार कर उचित निर्णय लें।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से पेश अधिवक्ता ने याचिकाकर्ताओं की इस सीमित प्रार्थना का विरोध नहीं किया।दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने नगर निगम बिलासपुर के कमिश्नर को सक्षम प्राधिकारी मानते हुए निर्देश दिया कि कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन पर नियमानुसार विचार किया जाए।कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने के भीतर अभ्यावेदन पर तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए।

अतिरिक्त दस्तावेज देने की भी मिली छूट

हाई कोर्ट ने कर्मचारियों को यह स्वतंत्रता भी दी है कि वे अपने नियमितीकरण के दावे के समर्थन में यदि कोई अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करना चाहते हैं, तो वे संबंधित प्राधिकारी के समक्ष नया या अतिरिक्त अभ्यावेदन दे सकते हैं।हालांकि कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट कर दी कि उसने कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावे के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।इसलिए अब नगर निगम के सक्षम प्राधिकारी को कर्मचारियों के अभ्यावेदन पर लागू नियमों, शासन के निर्देशों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्र रूप से फैसला लेना होगा।

तीन महीने में तय होगा कर्मचारियों का दावा

हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब कर्मचारियों की नजर नगर निगम के सक्षम प्राधिकारी के फैसले पर रहेगी। फिलहाल कोर्ट ने नियमितीकरण का लाभ देने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि लंबित अभ्यावेदन पर तीन महीने के भीतर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

 

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