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शिक्षकों को बड़ा झटका: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 16 जून 1993 के बाद नियुक्त शिक्षकों को नहीं मिलेगी वेतनवृद्धि, पढ़िए हाईकोर्ट ने क्या कहा…

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 75 प्रधान पाठकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि 16 जून 1993 के बाद नियुक्त शिक्षकों को बीएड-डीएलएड योग्यता हासिल करने के आधार पर दो अग्रिम वेतनवृद्धि नहीं मिलेगी।

August 19, 2026 11:32 AM
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षकों की दो अग्रिम वेतनवृद्धि से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सारंगढ़, रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के 75 प्रधान पाठकों की याचिका खारिज कर दी है। याचिकाकर्ताओं ने अपने खर्च पर बीएड और डीएलएड जैसी शैक्षणिक योग्यता हासिल करने के बदले दो अग्रिम वेतनवृद्धि दिए जाने की मांग की थी।

जस्टिस संजय के. अग्रवाल की पीठ ने कहा कि इसी मुद्दे पर हाईकोर्ट पहले ही अपना फैसला दे चुका है और उस निर्णय को बाद में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट भी बरकरार रख चुका है। ऐसे में पहले से स्थापित कानूनी स्थिति के विपरीत नया दावा स्वीकार करने का कोई आधार नहीं है।

16 जून 1993 के बाद बदले थे भर्ती नियम

हाईकोर्ट ने पूर्व के निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि 16 जून 1993 को शिक्षक भर्ती नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया था। संशोधन के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए बीएड, डीएलएड, बीटीआई जैसी व्यावसायिक योग्यताओं को आवश्यक कर दिया गया था।

इससे पहले शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए ये योग्यताएं अनिवार्य नहीं थीं। इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए शासन ने उन शिक्षकों को दो अग्रिम वेतनवृद्धि देने की नीति बनाई थी, जिन्होंने आवश्यक शैक्षणिक योग्यता अपने खर्च पर हासिल की थी।

कोर्ट ने कहा कि 16 जून 1993 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए बीएड, डीएलएड या संबंधित व्यावसायिक योग्यता नियुक्ति की आवश्यक शर्त बन चुकी थी। इसलिए नियुक्ति के बाद उसी अनिवार्य योग्यता को हासिल करने के आधार पर दो अग्रिम वेतनवृद्धि का दावा नहीं किया जा सकता।

75 प्रधान पाठकों ने दी थी चुनौती

याचिकाकर्ताओं ने 22 नवंबर 2019 को जारी उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें दो अग्रिम वेतनवृद्धि का पात्र नहीं माना गया था।

प्रधान पाठकों का तर्क था कि उन्होंने अपने खर्च पर बीएड, डीएलएड जैसी योग्यता हासिल की है। इसलिए उन्हें अतिरिक्त योग्यता प्राप्त करने के एवज में दो अग्रिम वेतनवृद्धि का लाभ दिया जाना चाहिए।

हालांकि, राज्य सरकार ने इस दावे का विरोध किया और पूर्व में इसी विषय पर दिए गए न्यायिक फैसलों का हवाला दिया।

नीलम दुबे मामले का दिया गया हवाला

राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि इसी मुद्दे पर नीलम दुबे बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामले में पहले ही न्यायिक निर्णय हो चुका है।

इस मामले में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 25 अप्रैल 2024 को याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद इस फैसले के खिलाफ दायर रिट अपील भी 9 अगस्त 2024 को खारिज हो गई थी।

इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) के माध्यम से चुनौती दी गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी 2 जुलाई 2025 को SLP खारिज कर दी।

पुराने फैसलों के कारण दावा स्वीकार नहीं किया

हाईकोर्ट ने इन सभी न्यायिक निर्णयों को देखते हुए कहा कि संबंधित मुद्दे पर कानूनी स्थिति पहले ही स्पष्ट हो चुकी है। जब पूर्व निर्णयों को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच और सुप्रीम कोर्ट से भी बरकरार रखा जा चुका है, तो उसी विषय पर विपरीत राहत देने का कोई आधार नहीं है।

इसी आधार पर कोर्ट ने सारंगढ़, रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के 75 प्रधान पाठकों की याचिका खारिज कर दी।

 

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