बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में विभाग में खरीदी व वितरण में भ्रष्टाचार का एक और गंभीर आरोप सामने आया है। इस बार शिकायत बिलासपुर से आयी है। बिलासपुर में स्वच्छता दीदियों को वितरित किए गए रेनकोट की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रेनकोट की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए महिलाओं ने नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि बारिश से बचाव के नाम पर ऐसा रेनकोट दिया गया है, जिसकी गुणवत्ता “पन्नी से भी बदतर” है।
रेनकोट की खराब गुणवत्ता को लेकर स्वच्छता दीदियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि उन्हें सुरक्षा उपकरण के नाम पर बेहद घटिया सामान दिया गया है, जिससे बारिश के दौरान काम करना मुश्किल हो जाएगा।
‘सुरक्षा नहीं, औपचारिकता निभाई गई’
इस मामले में स्वच्छता दीदियों का आरोप है कि यह रेनकोट उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय केवल औपचारिकता पूरी करने जैसा है। कुछ महिलाओं ने यह आशंका भी जताई कि यदि इस सामान की राशि उनके वेतन से काटी गई, तो यह और भी गंभीर मामला होगा। हालांकि, वेतन से कटौती की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन जिस तरह के रेनकोट का वितरण किया गया है और महिलाओं ने जिस कटे फटे रेन कोट को मीडिया के सामने दिखाया है, उससे आरोपों में जरूर बल मिल रहा है।
कार्रवाई की मांग तेज
मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग उठने लगी है। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर विरोध बढ़ रहा है और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। हालांकि इस मामले में प्रशासन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।
पहले भी उठ चुके हैं गुणवत्ता पर सवाल
छत्तीसगढ़ में सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत वितरित किए गए मंगलसूत्र की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे थे। लाभार्थी महिलाओं ने आरोप लगाया था कि कुछ ही महीनों में मंगलसूत्र का रंग काला पड़ गया। बाद में यह मामला विधानसभा तक पहुंचा और जांच में घटिया धातु के इस्तेमाल की बात सामने आई थी।अब बिलासपुर में स्वच्छता दीदियों को दिए गए रेनकोट को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर सरकारी खरीद और गुणवत्ता नियंत्रण पर बहस तेज कर दी है।
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।










