बिलासपुर। सांप कांटने से हुई मौत के नाम हुए मुआवजा घोटाले के तार काफी लंबे होते जा रहे हैं। मामले में महिला डाक्टर की गिरफ्तारी के बाद अब तीन और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान ये सामने आया है कि फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के नाम पर मुआवजा प्रकरण तहसीलदार व एसडीएम कार्यालय में ही तैयार किया जाता था। इस प्रकरण को तैयार करने वाले तीन कर्मचारी पुलिस के हत्थे चढ़े हैं।
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सर्पदंश से मौत के नाम पर सरकारी सहायता राशि के फर्जीवाड़े में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। सरकंडा पुलिस ने फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर सरकारी सहायता राशि दिलाने के मामले में SDM कार्यालय और तहसील कार्यालय के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
इस मामले में जिले में अब तक सर्पदंश के 15 फर्जी प्रकरण सामने आ चुके हैं। इससे पहले तोरवा पुलिस एक डॉक्टर और वकील समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।महिला डाक्टर से भी कईअहम जानकारी मिली है, जिसके बाद जांच का दायरा और ज्यादा बढ़ा है।
फांसी से हुई मौत को बना दिया सर्पदंश का मामला
सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य के अनुसार, क्षेत्र के एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। उस समय पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराया था।आरोप है कि बाद में इसी मर्ग के आधार पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दस्तावेज तैयार किए गए। इसके बाद तहसील कार्यालय के बाबू हरिशंकर राठौर, SDM कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक और गरीब बिंझवार की मदद से सर्पदंश से मौत का फर्जी प्रकरण बनाकर कलेक्टोरेट में पेश किया गया और सरकारी सहायता राशि निकाल ली गई।
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15 फर्जी मामलों का खुलासा
शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर ने जिले में सर्पदंश से मौत के मामलों की जांच कराई। जांच में 15 संदिग्ध प्रकरण सामने आए, जिनके आधार पर अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज की गई। जांच में SDM और तहसील कार्यालय के कर्मचारियों की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।
नाम-पता भी निकला फर्जी, मर्ग नंबर भी गलत
जांच में पुलिस को पता चला कि जिस मर्ग नंबर के आधार पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई थी, वह वास्तव में आत्महत्या के एक पुराने मामले का था। संबंधित व्यक्ति की मौत फांसी लगाने से हुई थी और उस मामले की जांच पहले ही पूरी कर खात्मे में भेजी जा चुकी थी।
इतना ही नहीं, जिस व्यक्ति के नाम पर सर्पदंश से मौत दिखाकर सहायता राशि निकाली गई, उसका नाम और पता भी फर्जी पाया गया। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है। बताया जा रहा है कि सिर्फ मृत व्यक्ति के नाम पर नहीं, बल्कि कुछ जिंदा लोगों के नाम पर भी मुआवजा की राशि निकाली गयी है। हालांकि इस मामले में अभी दस्तावेजी तौर पर कुछ प्रमाण पुलिस को हाथ नहीं लगा है।
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में ये मामला सदन में भी गूंज चुकी है। भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने इस प्रकरण को उठाया था। जिसके बाद से बिलासपुर पुलिस इस मामले की पड़ताल में जुटी है। माना जा रहा है कि जांच के बाद इस प्रकरण में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं। जानकार बताते है कि इस मामले में बिना अधिकारियों की संलिप्तता के कुछ नहीं हो सकता है, लिहाजा अफसरों की भूमिका की भी जांच की जायेगी, ताकि स्थिति और पूरी तरह से स्पष्ट हो सके।










