Chhattisgarh High Court Caste Certificate। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति (SC) के स्थायी जाति प्रमाणपत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने जाति प्रमाण पत्र को जारी करने को लेकर अफसरों को स्पष्ट निर्देश किया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी आवेदक के पिता और सगी बहन के पास पहले से स्थायी जाति प्रमाणपत्र मौजूद है, तो सक्षम अधिकारी इस महत्वपूर्ण तथ्य को अनदेखा नहीं कर सकते।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने संबंधित राजस्व अधिकारियों को नए आवेदन पर कानून के अनुसार विचार करते हुए 60 दिनों के भीतर तर्कसंगत और कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।यह आदेश न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने बिलासपुर जिले की बोदरी तहसील के ग्राम मुढ़ीपार निवासी निष्ठा बघेल और उनके नाबालिग भाई अभय बघेल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
जानिये क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया कि वे ‘महर’ समुदाय से संबंध रखते हैं, जिसे छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) का दर्जा प्राप्त है। प्रशासन पहले ही उन्हें अस्थायी जाति प्रमाणपत्र जारी कर चुका है। इसके अलावा उनके पिता और सगी बहन के पास भी स्थायी जाति प्रमाणपत्र मौजूद हैं।इसके बावजूद उन्हें स्थायी जाति प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया, जिसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट की शरण ली।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि जब परिवार के निकट संबंधियों के पास पहले से वैध स्थायी जाति प्रमाणपत्र उपलब्ध हैं, तो संबंधित अधिकारी इस तथ्य की अनदेखी नहीं कर सकते। ऐसे मामलों में सभी उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों का समुचित परीक्षण करना आवश्यक है।
अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता नया आवेदन प्रस्तुत करें और संबंधित राजस्व अधिकारी कानून के प्रावधानों के अनुरूप सभी दस्तावेजों का परीक्षण कर 60 दिनों के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करें।यह आदेश भविष्य में ऐसे मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां एक ही परिवार के सदस्यों के प्रमाणपत्र होने के बावजूद अन्य सदस्यों के आवेदन लंबित या निरस्त कर दिए जाते हैं।










