बलौदाबाजार। बलौदाबाजार में शनिवार से रविवार तक चली कार्रवाई को लेकर पूरे जिले में ईडी (ED) और आयकर (IT) की रेड की चर्चाएं होती रहीं, लेकिन अब इस कार्रवाई की असल वजह सामने आ गई है। उपलब्ध एफआईआर के मुताबिक यह कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच का हिस्सा थी। पूरा मामला बैंक फ्राड से जुड़ा है।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा (EOB), कोलकाता ने एक निजी कंपनी, उसके निदेशकों, गारंटर और कुछ अज्ञात बैंक अधिकारियों के खिलाफ कथित बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।मामला सिर्फ एक बैंक लोन का नहीं है, बल्कि जांच एजेंसियों के अनुसार इसमें फंड डायवर्जन, सर्कुलर ट्रांजैक्शन, संदिग्ध निर्यात दस्तावेज और बैंकिंग नियमों के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
जानिये कैसे शुरू हुई पूरी कहानी?
एफआईआर के अनुसार, 19 अप्रैल 2023 को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के रायपुर स्थित MSME लेंडिंग प्वाइंट ने धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड को बिटुमेन (डामर) के निर्यात कारोबार के लिए 15 करोड़ का एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट (EPC) मंजूर किया था। इस राशि का उद्देश्य कंपनी के निर्यात कारोबार को बढ़ावा देना था।
कुछ ही महीनों बाद बदले कंपनी के निदेशक
लोन स्वीकृत होने के कुछ समय बाद कंपनी के तत्कालीन निदेशक कुशल सोनी और सौरभ कुमार पारेख ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कंपनी की कमान अभिषेक गुप्ता और राजलक्ष्मी सर्राफ के हाथों में आ गई। जांच एजेंसियां इस बदलाव को भी पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा मानकर जांच कर रही हैं।
जांच में क्या सामने आया?
कथित घोटाले को लेकर बैंक का आरोप है कि लोन की राशि का उपयोग उस उद्देश्य के लिए नहीं किया गया, जिसके लिए बैंक ने वित्तीय सहायता दी थी। जांच में दावा किया गया है कि करोड़ों रुपये कंपनी से जुड़े अन्य कारोबारों और रिश्तेदारों की फर्मों में ट्रांसफर किए गए। इतना ही नहीं, मार्च 2024 के दौरान कैश क्रेडिट खाते से बड़ी रकम निकालकर एक संबंधित फर्म राधे कृष्णा एंटरप्राइजेज के माध्यम से उसी दिन वापस कंपनी के खाते में जमा कर दी गई। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के लेन-देन का उद्देश्य बैंक रिकॉर्ड में लोन खाते को सामान्य दिखाना था। इसे सर्कुलर ट्रांजैक्शन और फंड डायवर्जन का मामला बताया गया है।
स्पेशल ऑडिट में बढ़ा शक
जुलाई 2024 में कराए गए विशेष ऑडिट में कई गंभीर सवाल उठाए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि—
- निर्यात की रकम बैंक तक नहीं पहुंची।
- जोखिम मूल्यांकन में गंभीर कमियां रहीं।
- बैंकिंग नियमों का पालन नहीं किया गया।
- खाते के संचालन में कई अनियमितताएं मिलीं।
इसके बाद बैंक ने आंतरिक जांच और दोबारा ऑडिट भी कराया।
NPA से फ्रॉड तक का सफर
ऋण की नियमित किस्तें जमा नहीं होने पर 12 अक्टूबर 2024 को खाते को एनपीए (Non-Performing Asset) घोषित कर दिया गया। इसके बाद बैंक की जांच लगातार जारी रही। जांच में कथित तौर पर स्टॉक की कमी, संदिग्ध निर्यात दस्तावेज और संबंधित संस्थाओं के जरिए वित्तीय लेन-देन की बातें सामने आने का दावा किया गया। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर खाते को फ्रॉड घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
₹11.38 करोड़ की बकाया राशि
यूनियन बैंक के रिकॉर्ड के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक इस खाते में 11.38 करोड़ की बकाया देनदारी दर्ज थी। इसके बाद बैंक ने खाते को फ्रॉड घोषित करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को इसकी सूचना भेजी।
CBI ने दर्ज की FIR
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के उप महाप्रबंधक रणधीर कुमार की शिकायत पर 10 जुलाई 2026 को सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा (EOB), कोलकाता ने मामला दर्ज किया। एफआईआर में कंपनी, उसके निदेशकों, गारंटर और अज्ञात बैंक अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, दस्तावेजों में कथित हेराफेरी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत जांच शुरू की गई है। मामले की जांच सीबीआई के इंस्पेक्टर सौरभ कुमार सिंह कर रहे हैं।
बलौदाबाजार में कार्रवाई क्यों हुई?
सीबीआई की जांच के सिलसिले में बलौदाबाजार के गौरव पथ स्थित राजकुमार सर्राफ के आवास पर भी कार्रवाई की गई। शुरुआती दौर में इसे ईडी और आयकर विभाग की रेड माना जा रहा था, लेकिन अब सामने आया है कि यह कार्रवाई सीबीआई की एफआईआर के बाद चल रही जांच का हिस्सा थी।
अभी जांच जारी, आरोप साबित होना बाकी
गौरतलब है कि सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है। जांच एजेंसी दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है और किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि न्यायालय में सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही तय होगी।



















