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कलेक्टर-अपर कलेक्टर आमने-सामने: ‘यदि मेरे साथ कुछ हुआ तो जिम्मेदार कलेक्टर होंगी’, अपर कलेक्टर ने ST आयोग को लिखे पत्र में लगाए गंभीर आरोप

बेमेतरा के अपर कलेक्टर ने अनुसूचित जनजाति आयोग को लिखे पत्र में कलेक्टर पर मानसिक प्रताड़ना, बार-बार कारण बताओ नोटिस, सार्वजनिक अपमान और प्रशासनिक उपेक्षा के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पत्र में अपनी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंका जताई है।

August 7, 2026 10:07 AM
कलेक्टर पर अपर कलेक्टर के गंभीर आरोप
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बेमेतरा। बेमेतरा जिले में पदस्थ अपर कलेक्टर अपनी कलेक्टर से इस कदर परेशान हो गये हैं, उन्होंने अपनी अनहोनी का भी उन्हें जिम्मेदार बता दिया। अपनी प्रताड़ना की शिकायत अनुसूचित जनजाति आयोग को भी उन्होंने भेजा है। पूरा मामला बेमेतरा जिले की कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई और अपर कलेक्टर गुरुडू लाल लाल जगत से जुड़ा है। अपर कलेक्टर के लिखे गए पत्र के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

अपर कलेक्टर ने लिखा आयोग को पत्र

पत्र में अपर कलेक्टर ने कलेक्टर पर लगातार मानसिक प्रताड़ना, बिना उचित कारण कारण बताओ नोटिस जारी करने, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।अपर कलेक्टर ने आयोग को भेजे गए अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि लगातार मानसिक तनाव के कारण उनकी स्थिति प्रभावित हुई है और यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए कलेक्टर को जिम्मेदार माना जाए।

‘यदि मेरे साथ कुछ हुआ तो जिम्मेदार कलेक्टर होंगी’

18 जून 2026 को अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में अपर कलेक्टर ने लिखा कि लगातार मानसिक तनाव के कारण वे कई दिनों से ठीक से सो नहीं पा रहे हैं।पत्र में उन्होंने कहा है कि यदि उनके साथ किसी प्रकार की घटना, दुर्घटना अथवा उनकी मृत्यु होती है, तो इसके लिए बेमेतरा कलेक्टर पूर्ण रूप से जिम्मेदार होंगी।यह दावा अपर कलेक्टर द्वारा आयोग को भेजे गए पत्र का हिस्सा है और पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू माना जा रहा है।

टीएल बैठक में मौजूद होने के बावजूद नोटिस देने का आरोप

अपर कलेक्टर ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि उन्हें जारी किए गए पांच कारण बताओ नोटिसों में एक नोटिस ऐसा भी था, जिसमें उन्हें टीएल बैठक में अनुपस्थित बताया गया।उनका कहना है कि वे संबंधित बैठक में उपस्थित थे, इसके बावजूद अनुपस्थित दर्शाकर नोटिस जारी किया गया। उनके अनुसार इससे उन्हें यह महसूस हुआ कि उनके विरुद्ध जानबूझकर कार्रवाई की जा रही है। इसी कारण उन्होंने अनुसूचित जनजाति आयोग से हस्तक्षेप की मांग की।

खराब सरकारी वाहन देने का भी लगाया आरोप

अपर कलेक्टर ने प्रशासनिक उपेक्षा का आरोप लगाते हुए बताया कि 22 जुलाई 2026 को उन्हें जो सरकारी वाहन आवंटित किया गया, वह पहले से खराब और लंबे समय से अनुपयोगी था।उन्होंने कलेक्टर को लिखे पत्र में कहा कि यदि वाहन की मरम्मत नहीं कराई गई तो जिला मुख्यालय से बाहर के प्रशासनिक कार्यों का निर्वहन करना संभव नहीं होगा। उन्होंने इसे भी अपने कार्य में बाधा उत्पन्न करने वाला कदम बताया है।

मानसिक प्रताड़ना और प्रशासनिक व्यवहार पर उठे सवाल

अपर कलेक्टर के आरोपों में लगातार विभागीय नोटिस, सार्वजनिक अपमान, कार्य में बाधा और मानसिक उत्पीड़न जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है। इन आरोपों के सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यशैली और अधिकारियों के बीच कार्य वातावरण को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।हालांकि, इन आरोपों पर जिला प्रशासन या संबंधित कलेक्टर की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनका पक्ष सामने आने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।

आयोग से की है हस्तक्षेप की मांग

अपर कलेक्टर ने अनुसूचित जनजाति आयोग से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई करने और न्याय दिलाने की मांग की है। अब इस मामले में आयोग की ओर से होने वाली कार्रवाई पर प्रशासनिक महकमे की नजर बनी हुई है।

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