बेमेतरा आंदोलन का असर दिखना शुरू, सेवा सुरक्षा और TET पर शासन स्तर पर बढ़ी हलचल; रविंद्र राठौर बोले- नहीं मानी मांग, तो पूरे छत्तीसगढ़ में गूंजेगी शिक्षकों की आवाज
बेमेतरा/रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर बेमेतरा में हुए जोरदार आंदोलन का असर अब शासन स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। शिक्षकों के आंदोलन और लगातार उठाई जा रही मांगों के बीच शिक्षा विभाग सक्रिय हुआ है। संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह एवं संयुक्त संचालक से मुलाकात कर TET से प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा समेत विभिन्न मांगों को प्रमुखता से रखा।
वहीं, आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए मोर्चा ने 22 अगस्त को विकासखंड स्तर, 29 अगस्त को जिला स्तर पर प्रदर्शन और 9 सितंबर को न्याय पदयात्रा का ऐलान किया है। ऐसे में शासन और शिक्षक संगठनों के बीच हुई बातचीत को आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बेमेतरा आंदोलन के बाद संवाद की पहल
17 अगस्त को बेमेतरा में शिक्षक साझा मंच की ओर से किए गए आंदोलन में शिक्षकों ने सेवा सुरक्षा और TET की अनिवार्यता को लेकर जोरदार आवाज उठाई थी। आंदोलन के बाद संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल की शासन स्तर पर अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा हुई।
इसके बाद B.Ed-D.El.Ed ब्रिज कोर्स के संबंध में SCERT रायपुर में शिक्षक संगठनों को चर्चा के लिए बुलाया गया। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र फेडरेशन, नवीन शिक्षक संघ और सर्व शिक्षक संघ से जुड़े प्रतिनिधियों ने इसे आंदोलन के बाद संवाद के जरिए समाधान तलाशने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना।
TET से प्रभावित शिक्षकों को समाधान की उम्मीद
शिक्षक संगठनों का कहना है कि लंबे समय से सरकारी सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने TET की अनिवार्यता के कारण नौकरी और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ प्रभावित शिक्षकों के लिए व्यावहारिक रास्ता निकाला जाना जरूरी है।
मांगें नहीं मानी तो पूरे प्रदेश में दिखेगा शिक्षकों का आक्रोश: रवीन्द्र राठौर
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र फेडरेशन के अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने कहा कि वर्षों से शासकीय सेवा दे रहे शिक्षकों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की आवाज उठाना उनका अधिकार है और इसी अधिकार के तहत संगठन लगातार संघर्ष कर रहा है।
राठौर ने मांग की कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति का रास्ता निकाला जाए। साथ ही प्रभावित शिक्षकों के लिए व्यावहारिक समाधान के तौर पर साल में दो बार विभागीय TET परीक्षा आयोजित करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
सरकार अन्य राज्यों के विकल्पों पर रख रही नजर
बैठक के दौरान अधिकारियों की ओर से मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर आवश्यक चर्चा और समाधान की दिशा में पहल का भरोसा दिया गया। शिक्षक संगठनों को बताया गया कि अन्य राज्यों में TET से जुड़े मामलों में अपनाए जा रहे विकल्पों और समाधानों पर भी नजर रखी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा है, इसलिए उसी कानूनी स्थिति के अनुरूप ऐसा रास्ता तलाशना होगा जिससे शिक्षकों के हितों की भी रक्षा हो सके और न्यायिक स्थिति से टकराव की स्थिति भी न बने।जरूरत पड़ने पर शिक्षक संगठनों के साथ दोबारा बैठक कर संवाद के जरिए समाधान तलाशने का भी संकेत दिया गया है।
प्रदीप पाण्डेय बोले- सेवा सुरक्षा का समाधान होने तक जारी रहेगा आंदोलन
सर्व शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि बेमेतरा में उठी शिक्षकों की आवाज अब शासन के उच्च स्तर तक पहुंच चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा का ठोस समाधान होने तक लोकतांत्रिक और चरणबद्ध तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।
पाण्डेय ने कहा कि शिक्षकों के हितों से जुड़े मुद्दों पर किसी भी गलत नीति को स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन आगे भी शिक्षकों की मांगों को मजबूती से शासन के सामने रखता रहेगा।
विकास राजपूत ने वरिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति का मुद्दा उठाया
नवीन शिक्षक संघ के अध्यक्ष विकास राजपूत ने मुलाकात के दौरान वरिष्ठ शिक्षकों समेत प्रदेशभर के शिक्षकों की मांगों को अधिकारियों के सामने रखा।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2028 तक का अवसर दिया है। ऐसे में वरिष्ठता सूची के आधार पर वरिष्ठ शिक्षकों को निर्धारित अवधि के भीतर पदोन्नति का अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि उनकी सेवा सुरक्षा के साथ उनके अधिकार भी सुरक्षित रह सकें।
राजपूत ने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शासन को जल्द व्यावहारिक निर्णय लेना चाहिए।
9 सितंबर को न्याय पदयात्रा, आगे की रणनीति पर नजर
बेमेतरा आंदोलन के बाद शासन स्तर पर हुई बातचीत के बावजूद शिक्षक साझा मंच ने आंदोलन को पूरी तरह खत्म नहीं किया है। 22 अगस्त को विकासखंड स्तर पर प्रदर्शन, 29 अगस्त को जिलास्तरीय प्रदर्शन और 9 सितंबर को न्याय पदयात्रा का कार्यक्रम घोषित किया गया है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में ठोस पहल होती है तो सकारात्मक माहौल बनाया जा सकता है। वहीं, मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे और व्यापक करने की तैयारी है।
बेमेतरा आंदोलन के बाद शासन स्तर पर हुई यह मुलाकात फिलहाल शिक्षकों के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है। अब प्रदेश के हजारों शिक्षक सरकार के अगले कदम और TET से जुड़े समाधान का इंतजार कर रहे हैं।



















