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Bilaspur Fake Medical Bill Scam:शिक्षक नेता की गिरफ्तारी से कई अफसरों की नींद उड़ी, 30 लाख के मेडिकल बिल घोटाले की आंच अब अधिकारियों पर, पुलिस खंगाल रही है कुंडली

August 5, 2026 9:05 AM
बिलासपुर में फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में शिक्षक नेता गिरफ्तार
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बिलासपुर। शिक्षा विभाग में सामने आए 30 लाख के कथित फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में शिक्षक नेता साधेलाल की गिरफ्तारी से शिक्षा विभाग के कई अफसरों की भी नींद उड़ी हुई है। पूछताछ में साधेलाल ने अगर अपना मुंह खोला, तो कई अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती है। इससे पहले पुलिस ने इस मामले में मंगवार की रात मुख्य आरोपी साधे लाल पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है और मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के साथ-साथ तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।

फर्जी मेडिकल बिलों से निकाली गई थी लाखों की राशि

आरोप है कि विकासखंड शिक्षा कार्यालय के माध्यम से फर्जी मेडिकल बिल तैयार कर उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय और फिर राज्य स्तर तक भेजा गया। इसी प्रक्रिया के जरिए करीब 30 लाख रुपये का आवंटन विकासखंड शिक्षा कार्यालय तक पहुंचा और भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई।

शिकायत के बाद खुला पूरा मामला

मामले की शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू हुई। जांच के दौरान जिला चिकित्सालय ने संबंधित मेडिकल बिलों को फर्जी बताते हुए एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की। इसके बाद संयुक्त संचालक (JD) और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने भी कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी किए।

एफआईआर में देरी पर भी उठे थे सवाल

इस मामले में एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी भी चर्चा का विषय बनी थी। बताया गया कि शुरुआत में पुलिस को मूल दस्तावेजों की जगह केवल फोटोकॉपी दी गई थी, जिसके कारण एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी। बाद में मूल दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के बाद थाना सिटी कोतवाली ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

पत्नी और साले की भूमिका भी जांच के दायरे में

पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच में यह सामने आया है कि फर्जी मेडिकल बिलों के आधार पर मुख्य आरोपी की पत्नी और उसके साले के बैंक खातों में भी लाखों रुपये का भुगतान हुआ है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अब दोनों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुटी है।

पूर्व अधिकारियों पर भी कस सकता है शिकंजा

जांच अब केवल मुख्य आरोपी तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक उस समय पदस्थ रहे तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। आरोप है कि कार्यालय स्तर पर दस्तावेजों की स्वीकृति के बाद ही राज्य शासन से राशि का आवंटन कराया गया था। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

कई और खुलासों की उम्मीद

मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब पूरे शिक्षा विभाग की नजर पुलिस जांच पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस बहुचर्चित घोटाले में कई और नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल पुलिस दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की विवेचना कर रही है।

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