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धमतरी : सिहावा,भीतररास में भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम,बारिश के बौछार के बीच रथयात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब,करीब दो सौ वर्षों से चली आ रही है परंपरा….

July 17, 2026 4:03 AM
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धमतरी/सिहावा। सिहावा और भीतररास में बारिश के बौछार के बीच रथयात्रा महापर्व को लेकर लोगों में भारी उत्साह दिखा, लिहाजा आज गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की करीब 200 वर्ष पुरानी पारंपरिक रथयात्रा पूरे धार्मिक उल्लास और भक्ति भाव के साथ निकाली गई, जहां अंचल सहित दूर – दराज़ से बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र के दर्शन कर रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त किया।

बता दे कि वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र भव्य रूप से पारंपरिक रूप से सुसज्जित आकर्षक रथों में विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकले,सिहावा और भीतररास से निकले दोनों रथ प्रमुख गलियों, बाजार चौक और बस स्टैंड होते हुए पूरे नगर का भ्रमण कर निर्धारित स्थल पर पहुंचे।

रथयात्रा के दौरान दर्शन और गजा-मूंग प्रसाद लेने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा, वहीं धुमाल की गूंजती पारंपरिक धार्मिक गीतों पर भक्त पूरे उत्साह के साथ झूमते और जय जगन्नाथ के जयकारे लगाते नजर आए, जिससे पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।

रथयात्रा मार्ग में प्रत्येक घर के सामने महिलाओं ने थाल, दीपक और पूजा सामग्री के साथ भगवान की आरती उतारी तथा परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया,यह दृश्य श्रद्धा और संस्कृति का सुंदर संगम बन गया।

नगर भ्रमण के पश्चात रथ सिहावा के गणेश घाट से देउरपारा गांव की गलियों से होते हुए कर्णेश्वर मंदिर पहुंचे,जहां मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान का स्वागत किया। यहां भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

रथयात्रा को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सिहावा पुलिस की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी,नगर के प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहा, वहीं व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय युवाओं की स्वयंसेवक (वालेंटियर) टीम भी सक्रिय रही।

बारिश,भक्ति और परंपरा के अद्भुत संगम के बीच संपन्न हुई यह ऐतिहासिक रथयात्रा श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गई और पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था का अनुपम संदेश छोड़ गई।

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