बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जमीन से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ में जमीन पर निर्माण को लेकर सामने आई शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर कड़े निर्देश दिये हैं। CG High Court ने मामले में जांजगीर-चांपा कलेक्टर को याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन की जांच करने और संबंधित एसडीओ (राजस्व) से स्पष्टीकरण लेने का निर्देश दिया है।
अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि एसडीओ अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों पर 10 दिन के भीतर शपथपत्र दाखिल करें।यह मामला राज कुमार रोहिदास बनाम छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने 20 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।
निर्माण पर रोक के बाद दस्तावेज लेने से इनकार का आरोप
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रकाश मणि श्रीवास ने हाई कोर्ट को बताया कि पामगढ़ के एसडीओ (राजस्व) ने 25 मई 2026 को आदेश जारी कर संबंधित भूमि पर किए जा रहे निर्माण पर रोक लगा दी थी।इसके बाद याचिकाकर्ता अपने कब्जे और निर्माण को वैध साबित करने से संबंधित दस्तावेज लेकर एसडीओ के समक्ष पहुंचे।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि वे संबंधित जमीन पर वैध कब्जे में हैं और निर्माण भी उनके अधिकारों के अनुरूप है।हालांकि, आरोप है कि एसडीओ ने उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लेने से इनकार कर दिया। साथ ही उन्हें अपना पक्ष रखने और मामले में सुनवाई का उचित अवसर भी नहीं दिया गया।
हाई कोर्ट ने कलेक्टर को दिया जांच का निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने जांजगीर-चांपा कलेक्टर को याचिकाकर्ताओं की शिकायत पर गंभीरता से विचार कर जांच करने का निर्देश दिया है।अदालत ने कहा है कि कलेक्टर संबंधित एसडीओ से यह स्पष्ट कराएं कि याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर क्यों नहीं लिया गया।
इसके अलावा यह भी पूछा जाएगा कि याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर क्यों नहीं दिया गया।कलेक्टर को यह भी जांच करनी होगी कि शिकायत सामने आने के बाद संबंधित एसडीओ ने उसके निराकरण के लिए कोई उचित कदम उठाया था या नहीं।
आरोप सही पाए गए तो होगी कार्रवाई
हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार कलेक्टर को पूरे मामले की जांच करनी होगी। यदि जांच में याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।इस आदेश के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर एसडीओ की भूमिका और याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश किए जाने वाले दस्तावेजों की प्रक्रिया की जांच की जाएगी।
एसडीओ को 10 दिन में देना होगा शपथपत्र
हाई कोर्ट ने मामले में संबंधित एसडीओ (राजस्व), पामगढ़ को अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों पर 10 दिन के भीतर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।शपथपत्र में विशेष रूप से दो प्रमुख बिंदुओं पर जवाब देना होगा—याचिकाकर्ताओं के दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लेने से इनकार क्यों किया गया और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर क्यों नहीं दिया गया।अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक स्पष्टीकरण और दस्तावेजों के साथ शपथपत्र 7 सितंबर 2026 तक दाखिल करने का निर्देश दिया है।
9 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले में अब अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को होगी। तब तक कलेक्टर की ओर से जांच और संबंधित एसडीओ का शपथपत्र अदालत के समक्ष पेश किया जाना है।फिलहाल हाई कोर्ट के इस आदेश से यह स्पष्ट है कि अदालत ने प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेज स्वीकार नहीं करने और पक्ष रखने का अवसर नहीं दिए जाने की शिकायत को गंभीरता से लिया है। अब कलेक्टर की जांच और एसडीओ के शपथपत्र के आधार पर मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।


















