Teacher Highcourt News। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शिक्षक के ट्रांसफर से जुड़े अहम मामलों पर फैसला सुनाया है। छत्तीसगढ़ में तबादले का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां विभागीय रिकॉर्ड की गलती के कारण एक प्रधानाध्यापक को सहायक शिक्षक मानकर दूसरे स्कूल भेज दिया गया। मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो शासन ने कोर्ट में गलती स्वीकार कर ली। इसके बाद कोर्ट ने संबंधित तबादला आदेश को निरस्त कर दिया।
पूरा मामला धमतरी जिले की एक प्रधान पाठक से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक प्रधानाध्यापक के तबादले से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। विभागीय रिकॉर्ड में पद की गलत जानकारी के आधार पर किए गए तबादले को कोर्ट ने निरस्त कर दिया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने खुद स्वीकार किया कि प्रशासनिक त्रुटि के कारण प्रधानाध्यापक दूज बाई कंवर को सहायक शिक्षक मान लिया गया था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने की। कोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को जारी तबादला आदेश को याचिकाकर्ता की सीमा तक रद्द करते हुए विभाग को नियमों के तहत नया आदेश जारी करने की छूट दी है।
प्रधानाध्यापक को भेज दिया दूसरे स्कूल
दूज बाई कंवर धमतरी जिले के कुरूद ब्लॉक स्थित शासकीय प्राथमिक स्कूल बिछपारा परखंडा में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। विभाग ने 6 अगस्त को जारी स्थानांतरण आदेश में उनका तबादला मगरलोड ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक स्कूल लाडेर कर दिया था।याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट का रुख करते हुए कहा कि तबादला आदेश में उनकी पदस्थापना प्रधानाध्यापक के बजाय सहायक शिक्षक के रूप में दर्शाई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि जिस स्कूल में उनका स्थानांतरण किया गया है, वहां पहले से ही एक प्रधानाध्यापक पदस्थ है।
सरकार ने कोर्ट में मानी प्रशासनिक गलती
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पेश शासकीय अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि विभागीय स्तर पर हुई प्रशासनिक भूल के कारण दूज बाई कंवर की पदस्थिति गलत दर्ज हो गई थी और उन्हें सहायक शिक्षक मानते हुए तबादला आदेश जारी कर दिया गया।कोर्ट ने राज्य सरकार की इस स्वीकारोक्ति और मामले के तथ्यों को देखते हुए माना कि याचिकाकर्ता के वास्तविक पद पर उचित विचार किए बिना स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था।
विभाग अब जारी कर सकेगा नया आदेश
हाई कोर्ट ने 6 अगस्त के स्थानांतरण आदेश को दूज बाई कंवर की सीमा तक निरस्त कर दिया। साथ ही विभाग को नियमों के अनुसार उनकी वास्तविक पदस्थिति और अन्य आवश्यक पहलुओं पर विचार करते हुए नया स्थानांतरण आदेश जारी करने की अनुमति दी है। सरकारी रिकॉर्ड में हुई एक छोटी-सी गलती ने एक प्रधानाध्यापक का तबादला ही गलत स्कूल में कर दिया।
विभाग ने प्रधानाध्यापक को सहायक शिक्षक मानकर ट्रांसफर ऑर्डर जारी कर दिया, लेकिन मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो सरकार ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। इसके बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने तबादला आदेश को निरस्त करते हुए विभाग को नियमों के तहत नया आदेश जारी करने की छूट दे दी। इस आदेश के बाद प्रधानाध्यापक को गलत पदनाम के आधार पर किए गए तबादले से राहत मिली है।



















