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CG Teacher News: वरीष्ठता प्रभावित शिक्षकों को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अंतरजिला तबादले के बावजूद नहीं जायेगी सीनियरिटी, 22 प्रधान पाठकों की वरिष्ठता मामले में सरकार को झटका

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रायपुर जिले के 22 प्रधान पाठकों की वरिष्ठता से जुड़े मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने रिव्यू याचिका खारिज करते हुए 12 फरवरी 2025 के आदेश को बरकरार रखा है। इसके तहत प्रधान पाठकों की वरिष्ठता उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख

August 26, 2026 2:06 PM
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रायपुर जिले के 22 प्रधान पाठकों की वरिष्ठता से जुड़े मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की रिव्यू पिटिशन खारिज करते हुए अपने पूर्व के फैसले को बरकरार रखा है। इसके साथ ही 22 प्रधान पाठकों को उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख 10 दिसंबर 2010 से वरिष्ठता दिए जाने का रास्ता साफ हो गया है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की ओर से समीक्षा याचिका में ऐसा कोई स्पष्ट कानूनी त्रुटि का आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिसके आधार पर 12 फरवरी 2025 को दिए गए आदेश की समीक्षा की जा सके। जस्टिस एके प्रसाद के बेंच ने ये फैसला दिया है।

बलौदाबाजार-भाटापारा में हुई थी प्रारंभिक नियुक्ति

मामला रायपुर जिले में पदस्थ 22 प्रधान पाठकों से जुड़ा है। इन प्रधान पाठकों की प्रारंभिक नियुक्ति 10 दिसंबर 2010 को प्राथमिक शाला प्रधान पाठक के पद पर तत्कालीन शिक्षा जिला बलौदाबाजार-भाटापारा में हुई थी। उस समय बलौदाबाजार-भाटापारा रायपुर राजस्व जिले का हिस्सा था।बाद में बलौदाबाजार-भाटापारा अलग जिला बन गया। इसके बाद वर्ष 2017 में इन 22 प्रधान पाठकों ने स्वयं के अनुरोध और अपने खर्च पर रायपुर जिले में तबादला कराया।

तबादले के बाद शुरू हुआ वरिष्ठता विवाद

तबादले के बाद प्रधान पाठकों की वरिष्ठता को लेकर विवाद खड़ा हो गया। शुरुआत में उनकी वरिष्ठता प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से मानी गई। लेकिन बाद में शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई ग्रेडेशन सूची में उनकी वरिष्ठता रायपुर जिले में तबादले के बाद जॉइनिंग की तारीख से तय कर दी गई।इसका सीधा असर उनकी सेवा स्थिति और पदोन्नति पर पड़ा। वर्ष 2017 में रायपुर जिले में पदभार ग्रहण करने की तारीख से वरिष्ठता तय होने के कारण वे रायपुर जिले में पहले से कार्यरत कई कर्मचारियों से नीचे चले गए।

2021 की ग्रेडेशन सूची को दी थी चुनौती

22 प्रधान पाठकों ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 16 मार्च 2021 को जारी ग्रेडेशन सूची को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। प्रधान पाठकों ने तर्क दिया था कि उनकी मूल नियुक्ति 10 दिसंबर 2010 को हुई थी और केवल अंतर-जिला तबादले के कारण उनकी पहले से अर्जित वरिष्ठता समाप्त नहीं हो सकती।हाई कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए 12 फरवरी 2025 को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। कोर्ट ने अधिकारियों को ग्रेडेशन सूची में आवश्यक संशोधन करने और प्रधान पाठकों की वरिष्ठता उनकी प्रारंभिक नियुक्ति यानी 10 दिसंबर 2010 से तय करने का निर्देश दिया था।कोर्ट ने इसके साथ ही प्रधान पाठकों को वरिष्ठता के आधार पर मिलने वाले सभी परिणामी लाभ देने के भी निर्देश दिए थे।

राज्य सरकार ने फैसले के खिलाफ दायर की रिव्यू पिटिशन

हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने समीक्षा याचिका दायर की थी। सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि प्रधान पाठकों ने स्वयं के अनुरोध पर दूसरे जिले में तबादला कराया था। ऐसे में उन्हें नए जिले में पहले से कार्यरत कर्मचारियों के नीचे वरिष्ठता मिलनी चाहिए।राज्य सरकार ने कहा कि प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर होने वाले तबादले और कर्मचारी के स्वयं के अनुरोध पर होने वाले तबादले के परिणाम अलग होते हैं।सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का हवाला दिया गया। साथ ही 29 जनवरी 2009 के विभागीय पत्र और 24 अगस्त 1976 के सर्कुलर का उल्लेख करते हुए कहा गया कि अनुरोध पर दूसरे कैडर या जिले में तबादला कराने वाले कर्मचारी को पुराने स्थान की वरिष्ठता का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।

हाई कोर्ट ने कहा- पुराने तर्कों पर फिर से बहस नहीं हो सकती

रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के तर्कों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि सरकार की ओर से अनुरोध पर तबादले से संबंधित तर्क मूल याचिका की सुनवाई के दौरान भी प्रस्तुत किए जा चुके थे।हाई कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में इन दलीलों और सुप्रीम कोर्ट के केपी सुधाकरन मामले के फैसले पर विचार किया था। ऐसे में इन्हीं तर्कों को समीक्षा याचिका के माध्यम से दोबारा सुनवाई का आधार नहीं बनाया जा सकता।

बाद का फैसला पुराने आदेश में त्रुटि नहीं बन सकता

राज्य सरकार ने केसी देवकी मामले में आए फैसले का भी हवाला दिया था। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि यह फैसला 25 मार्च 2025 को आया था, जबकि जिस आदेश की समीक्षा मांगी गई है, वह 12 फरवरी 2025 का है।कोर्ट ने कहा कि किसी बाद के फैसले के आने मात्र से पहले दिए गए आदेश में अपने आप कोई ऐसी स्पष्ट कानूनी त्रुटि उत्पन्न नहीं हो जाती, जिसके आधार पर समीक्षा की जा सके।

विभागीय पत्र को कोर्ट ने नहीं माना निर्णायक आधार

हाई कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार स्वयं मान रही है कि 29 जनवरी 2009 का पत्र कोई वैधानिक नियम नहीं बल्कि विभागीय स्पष्टीकरण है।दूसरी ओर प्रधान पाठकों की ओर से छत्तीसगढ़ सेवा सामान्य शर्त नियम, 1961 के नियम 12 का हवाला दिया गया। उनका तर्क था कि नियमों में अंतर-जिला तबादले के कारण पहले से अर्जित वरिष्ठता समाप्त होने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।हाई कोर्ट ने कहा कि वैधानिक नियमों और विभागीय निर्देशों की व्याख्या कर नया निष्कर्ष निकालना समीक्षा के सीमित अधिकार क्षेत्र में संभव नहीं है।

22 प्रधान पाठकों को बड़ी राहत

इन टिप्पणियों के साथ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की रिव्यू पिटिशन खारिज कर दी है। इससे 12 फरवरी 2025 के मूल आदेश को बरकरार रखा गया है और 22 प्रधान पाठकों को उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता दिए जाने का फैसला कायम रहेगा।कोर्ट के फैसले के बाद संबंधित प्रधान पाठकों को संशोधित ग्रेडेशन सूची और वरिष्ठता के आधार पर मिलने वाले अन्य परिणामी लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

 

 

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