बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र मान्य नहीं होगा। अदालत ने कहा कि छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होने का प्रमाण केवल तहसीलदार या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी मूल निवासी (Residential/Domicile) प्रमाण पत्र से ही सिद्ध होगा।न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की एकलपीठ ने रायपुर निवासी जसपाल सिंह की याचिका का निपटारा करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।
डेयरी योजना की सब्सिडी के मामले में आया फैसला
मामला राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना से जुड़ा है। याचिकाकर्ता जसपाल सिंह ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र से 12 लाख रुपये का ऋण लेकर डेयरी फार्म स्थापित किया था। उन्होंने योजना के तहत 50 प्रतिशत सब्सिडी के लिए आवेदन किया, लेकिन आवश्यक दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण उनका दावा स्वीकृत नहीं हुआ।इसके बाद उन्होंने राहत के लिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सरपंच का प्रमाण पत्र कोर्ट ने माना अमान्य
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि इस योजना का लाभ केवल छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को दिया जा सकता है और इसके लिए वैध मूल निवासी प्रमाण पत्र अनिवार्य है।याचिकाकर्ता की ओर से सुनवाई के दौरान ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया। इस पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि सरपंच द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी मूल निवासी प्रमाण पत्र का विकल्प नहीं हो सकता। इसलिए इसे कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि सरकारी योजनाओं में पात्रता का निर्धारण संबंधित नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार ही होगा। यदि किसी योजना में मूल निवासी प्रमाण पत्र आवश्यक है, तो केवल तहसीलदार या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र ही मान्य होगा।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया में निर्धारित नियमों से हटकर अन्य दस्तावेजों के आधार पर लाभ नहीं दिया जा सकता।
याचिकाकर्ता को दिया यह निर्देश
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह संबंधित विभाग के समक्ष तहसीलदार द्वारा जारी वैध मूल निवासी प्रमाण पत्र तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें।इसके बाद संयुक्त संचालक, पशु चिकित्सा सेवा, रायपुर को निर्देश दिया गया कि दस्तावेज प्राप्त होने की तारीख से तीन माह के भीतर कानून के अनुसार सब्सिडी के दावे पर अंतिम निर्णय लें।
फैसले का क्या होगा असर?
यह फैसला उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन करते हैं। अब यह स्पष्ट हो गया है कि सरपंच, पंचायत सचिव या अन्य स्थानीय निकाय द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र सरकारी योजनाओं में मूल निवासी प्रमाण पत्र का विकल्प नहीं माना जाएगा।योजना का लाभ लेने के लिए तहसीलदार या अधिसूचित सक्षम अधिकारी द्वारा जारी मूल निवासी (Domicile) प्रमाण पत्र ही प्रस्तुत करना होगा।



















