रायपुर। प्रतिनियुक्ति खत्म करने को लेकर शिक्षा विभाग के तेवर पर नरमी बरतने का अनुरोध किया गया है। आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि छात्रावास अधीक्षकों की नियमित भर्ती पूरी होने तक वर्तमान में प्रतिनियुक्त शिक्षकों को यथावत कार्य करने दिया जाए।
विभाग का कहना है कि इन शिक्षकों को हटाने से दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इस पत्र के बाद छत्तीसगढ़ में छात्रावासों में प्रतिनियुक्त शिक्षकों को हटाने के मुद्दे पर नया मोड़ आ गया है।


अभी 1856 शिक्षक संभाल रहे हैं जिम्मेदारी
प्रमुख सचिव ने पत्र में बताया है कि वर्तमान में 1856 शिक्षक एवं कर्मचारी छात्रावास अधीक्षकों और अन्य आवश्यक पदों का प्रभार संभाल रहे हैं। यह व्यवस्था स्थायी प्रतिनियुक्ति नहीं, बल्कि नियमित अधीक्षकों की नियुक्ति तक विद्यार्थियों के हित में की गई अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था है।पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ये सभी शिक्षक शैक्षणिक व्यवस्था के अंतर्गत ही कार्यरत हैं और उन्हें किसी गैर-शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाया गया है।
शिक्षकों को हटाया तो बंद हो सकते हैं छात्रावास
आदिम जाति विभाग ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को छात्रावासों से वापस बुलाया गया, तो कई छात्रावासों के संचालन में गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। इससे दूरस्थ, दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले हजारों विद्यार्थियों की आवासीय सुविधा, सुरक्षा, अनुशासन, पोषण और पढ़ाई प्रभावित होगी। कई स्थानों पर छात्रावास बंद करने जैसी स्थिति भी बन सकती है।
विद्यार्थियों के हित में मांगी अनुमति
प्रमुख सचिव ने शिक्षा विभाग से अनुरोध किया है कि नियमित छात्रावास अधीक्षकों की नियुक्ति पूरी होने तक वर्तमान में प्रतिनियुक्त शिक्षकों को छात्रावासों में कार्य जारी रखने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि इससे विभागीय व्यवस्था प्रभावित हुए बिना दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षा, सुरक्षा और आवासीय सुविधाएं लगातार मिलती रहेंगी।
यह पत्र ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में शिक्षकों के संलग्नीकरण (प्रतिनियुक्ति) को लेकर लगातार बहस चल रही है। ऐसे में आदिम जाति विभाग का यह प्रस्ताव आने वाले दिनों में सरकार के स्तर पर महत्वपूर्ण निर्णय का आधार बन सकता है।



















