रायपुर। TET को लेकर चल रहे शिक्षकों के आंदोलन के बीच एक बड़ी खबर आयी है। TET सहित शिक्षकों की अन्य मांगों पर बातचीत के लिए सरकार तैयार हो गयी है। शिक्षा मंत्री ने शिक्षक संगठनों के नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया है। इस नयी कवायद के बीच छत्तीसगढ़ में TET से प्रभावित शिक्षकों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है।
शिक्षकों के आक्रामक तेवर के बाद सरकार ने बातचीत का रास्ता अपनाया है। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया है। 26 अगस्त को दोपहर 1 बजे शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले में बैठक होगी, जिसमें TET समेत शिक्षकों की प्रमुख मांगों पर चर्चा की जाएगी।
इस बैठक में सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष रवींद्र राठौर, शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय संचालक एवं संयुक्त शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष केदार जैन, शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे और टीचर्स एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष संजय शर्मा, नवीन शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विकास राजपूत और सर्व शिक्षक संघ से प्रदीप पांडेय शामिल होंगे।
शिक्षक संघ के किया है 27 से आंदोलन ऐलान
आपको बता दें कि शिक्षक संघ ने 27 अगस्त से आंदोलन का ऐलान किया है
मोर्चा के आंदोलन के कुछ घंटे बाद आया सरकार का बुलावा
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने आज प्रदेशभर में TET की अनिवार्यता और सेवा सुरक्षा के मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन किया। जिला मुख्यालयों में रैली निकालकर शिक्षकों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।मोर्चा ने साफ चेतावनी दी थी कि यदि सरकार ने शिक्षकों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदेशभर में एक साथ हुए इस प्रदर्शन और शिक्षकों के कड़े रुख के बाद सरकार की ओर से बातचीत का बुलावा भेजा गया है। अब सरकार और शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठकर समाधान तलाशने की कोशिश करेंगे।
सरकार ने TET पर नरम किए रुख के संकेत
आज ही शिक्षा विभाग की बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने संकेत दिए थे कि सरकार शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर विकल्पों पर विचार कर रही है।उन्होंने कहा था कि शिक्षा सचिव इस संबंध में मध्य प्रदेश सरकार के लगातार संपर्क में हैं। मध्य प्रदेश में विभागीय स्तर पर अपनाए गए TET मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है और छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह का रास्ता अपनाने पर विचार हो रहा है।मंत्री के इस बयान को TET से प्रभावित शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब कल की बैठक में इस मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई ठोस प्रस्ताव सामने आता है या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी।
TET से लेकर वेतन विसंगति तक, मोर्चा की पांच बड़ी मांगें
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सरकार के सामने सिर्फ TET का मुद्दा नहीं रखा है। मोर्चा की पांच प्रमुख मांगें हैं—
1. TET से राहत
सेवा सुरक्षा और पदोन्नति के लिए शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से पूर्ण राहत दी जाए।
2. पूर्व सेवा अवधि का लाभ
पूर्व सेवा की गणना करते हुए शिक्षकों को पूर्ण पेंशन और अन्य सभी सेवा लाभ दिए जाएं।
3. केंद्रीय वेतनमान
राज्य के शिक्षकों को केंद्र के समान वेतनमान दिया जाए और वेतन विसंगतियां दूर की जाएं।
4. भर्ती और पदोन्नति नियमों में बदलाव
13 फरवरी 2026 को लागू भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधन किया जाए।
5. B.Ed. ब्रिज कोर्स
सेवा सुरक्षा और पदोन्नति के लिए शासन स्तर पर शिक्षकों को B.Ed. कराने के लिए ब्रिज कोर्स की व्यवस्था की जाए।
मोर्चा की एकजुटता को मिला वार्ता का परिणाम
शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आंदोलन का नेतृत्व केदार जैन, वीरेंद्र दुबे और संजय शर्मा जैसे प्रमुख नेताओं ने किया। अलग-अलग शिक्षक संगठनों के एक मंच पर आने से TET का मुद्दा प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुका है।
सोमवार के प्रदर्शन के दौरान मोर्चा का रुख काफी आक्रामक था। नेताओं ने स्पष्ट किया कि सरकार यदि सेवा सुरक्षा और TET की बाध्यता पर ठोस निर्णय नहीं लेती है तो शिक्षक बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
ऐसे में प्रदर्शन के तुरंत बाद सरकार की ओर से बातचीत का बुलावा आना आंदोलन के दबाव का असर माना जा रहा है।
कल की बैठक में निकल सकता है समाधान का रास्ता
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 26 अगस्त की बैठक में क्या होगा? शिक्षक संघर्ष मोर्चा सरकार से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि TET और अन्य मांगों पर ठोस निर्णय की उम्मीद कर रहा है।
शिक्षा मंत्री के मध्य प्रदेश के विभागीय TET मॉडल को लेकर दिए गए बयान और आंदोलन के बाद वार्ता का बुलावा मिलने से शिक्षकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। हालांकि, अंतिम समाधान बैठक में होने वाली चर्चा और सरकार के अगले निर्णय पर निर्भर करेगा।
फिलहाल TET को लेकर सड़कों पर उतरे शिक्षक अब बातचीत की टेबल तक पहुंच चुके हैं। कल की बैठक तय करेगी कि आंदोलन थमेगा या फिर शिक्षक संघर्ष और तेज होगा।
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