रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर स्थानांतरण (Transfer Policy 2026) को लेकर कर्मचारियों की मांग तेज हो गई है। लंबे समय से खुली स्थानांतरण नीति की मांग कर रहे कर्मचारियों ने पत्र लिखकर तबादले में लगी रोक को हटाने की मांग की है।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मुख्य सचिव को अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर जल्द नई तबादला नीति लागू करने की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि स्थानांतरण पर लगी रोक के कारण हजारों कर्मचारी और अधिकारी वर्षों से पारिवारिक एवं प्रशासनिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
इसी के साथ फेडरेशन ने अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में भी बदलाव की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि तृतीय श्रेणी के पदों पर लागू 10 प्रतिशत की सीमा (Ceiling Limit) समाप्त की जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र परिवारों को समय पर नौकरी मिल सके।
स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग क्यों उठी?
फेडरेशन ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने 5 जून 2025 को स्थानांतरण नीति जारी की थी, लेकिन वर्ष 2026 में अब तक नई ट्रांसफर पॉलिसी लागू नहीं होने से कर्मचारी लगातार असमंजस की स्थिति में हैं।
संगठन का कहना है कि लंबे समय से स्थानांतरण बंद होने के कारण कई कर्मचारियों की पारिवारिक और सामाजिक समस्याएं बढ़ गई हैं। इसलिए सरकार को जल्द नई स्थानांतरण नीति जारी कर प्रतिबंध हटाना चाहिए।
फेडरेशन ने सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें
ज्ञापन में स्थानांतरण नीति को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए हैं।
1. पति-पत्नी को एक ही जिले में पदस्थ करने की व्यवस्था
फेडरेशन का कहना है कि कई सरकारी कर्मचारी पति-पत्नी अलग-अलग जिलों में कार्यरत हैं। इससे परिवार और बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। नई नीति में ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता देकर एक स्थान पर पदस्थापना का प्रावधान किया जाए।
2. मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को छूट
संगठन ने मांग की है कि पूर्व की तरह मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को स्थानांतरण नीति में विशेष छूट दी जाए।
3. गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों को राहत
ज्ञापन में कहा गया है कि कैंसर, किडनी, दिव्यांगता और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों को स्थानांतरण में विशेष प्राथमिकता और राहत मिलनी चाहिए।

अनुकंपा नियुक्ति के नियम बदलने की भी मांग
फेडरेशन ने मुख्यमंत्री को सौंपे दूसरे ज्ञापन में अनुकंपा नियुक्ति नीति में संशोधन की मांग की है।संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में तृतीय श्रेणी के केवल 10 प्रतिशत पदों पर ही अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान है। इस सीमा के कारण हजारों पात्र परिवार वर्षों तक नौकरी का इंतजार करते रहते हैं।
फेडरेशन का तर्क है कि कई विभागों में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं, जबकि रिक्त पद होने के बावजूद 10 प्रतिशत की सीमा के कारण नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं।
क्या है फेडरेशन की मांग?
फेडरेशन ने सरकार से मांग की है कि—
• तृतीय श्रेणी के पदों पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए लागू 10 प्रतिशत की सीमा समाप्त की जाए।
• तृतीय श्रेणी के रिक्त पदों पर भी चतुर्थ श्रेणी की तरह बिना सीलिंग के नियुक्ति की व्यवस्था लागू की जाए।
• पात्र आश्रितों को समयबद्ध तरीके से नियुक्ति दी जाए।
संगठन का कहना है कि इससे दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी और वर्षों से लंबित मामलों का भी समाधान होगा।
सरकार के फैसले पर टिकी कर्मचारियों की नजर
छत्तीसगढ़ में हर वर्ष स्थानांतरण नीति को लेकर बड़ी संख्या में कर्मचारी इंतजार करते हैं। इस बार भी कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने सरकार के सामने अपनी मांगें रख दी हैं। अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार नई ट्रांसफर पॉलिसी 2026 कब जारी करती है और अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में कोई बदलाव करती है या नहीं।



















