बिलासपुर 9 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्राकृतिक आपदा से होने वाली मौतों को लेकर बड़ा आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने मुआवजा देने संबंधी राज्य सरकार की नीति की महत्वपूर्ण व्याख्या करते हुए कड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आंधी-तूफान, तेज बारिश और तेज हवा के दौरान पेड़ से गिरकर हुई मौत भी प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में आएगी। कोर्ट ने राजस्व विभाग द्वारा मुआवजा देने से इनकार करने का आदेश रद्द करते हुए मृतक के आश्रित को 30 दिनों के भीतर 4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि देने के निर्देश दिए हैं।
मुआवजा देने से किया गया था इनकार
दरअसल ये पूरा मामला राजनांदगांव जिले का है। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच की और पोस्टमार्टम समेत सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद मृतक के बेटे ने राज्य सरकार की प्राकृतिक आपदा राहत नीति के तहत चार लाख रुपये की सहायता राशि के लिए आवेदन किया। नायब तहसीलदार ने जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा देने की अनुशंसा भी की थी। इसके बावजूद अतिरिक्त कलेक्टर ने 1 फरवरी 2021 को यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि पेड़ से गिरने के कारण हुई मौत राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) के प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आती।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने 9 जून 2015 के राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) की धारा-6 का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि आंधी, तूफान, अतिवृष्टि या बाढ़ के दौरान पेड़ या उसकी डाल गिरने अथवा ऐसी परिस्थितियों में हुई मृत्यु को दैवीय (प्राकृतिक) आपदा माना जाएगा।कोर्ट ने पाया कि इस मामले में भी व्यक्ति की मौत सीधे तौर पर आंधी-तूफान के दौरान पेड़ से गिरने के कारण हुई थी। ऐसे में यह प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में आती है और पीड़ित परिवार राहत राशि पाने का हकदार है।
30 दिन में 4 लाख रुपये देने के निर्देश
हाई कोर्ट ने अतिरिक्त कलेक्टर का आदेश निरस्त करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 30 दिनों के भीतर चार लाख रुपये की मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाए। कोर्ट ने कहा है कि पेड़ से गिरकर भी हुई मौत प्राकृतिक आपदा मानी जाएगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को मृतक के आश्रित को 30 दिन के भीतर 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।










