Chhattisgarh Weather Update। छत्तीसगढ़ में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। इस सप्ताह दंतेवाड़ा के रास्ते मानसून की छत्तीसगढ में इंट्री के बाद जैसी बारिश की उम्मीद थी, वैसी बारिश नहीं हुई है। मौजूदा हाल ये है कि प्रदेश के आधे से ज्यादा जिले बारिश की भारी कमी से जूझ रहे हैं, जिससे खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित होने लगी है। मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से अब तक प्रदेश में सामान्य 117.2 मिमी बारिश के मुकाबले केवल 43.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 73 प्रतिशत कम है।कम बारिश का असर अब खेती-किसानी के साथ-साथ जलाशयों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, बालोद समेत कई जिलों में किसान पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
27 जून के बाद तेज हो सकती है बारिश
मौसम विभाग का कहना है कि 27 जून से प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। हालांकि फिलहाल लोगों को गर्मी और उमस से राहत नहीं मिल पा रही है।मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अगले तीन से चार दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून छत्तीसगढ़ के शेष हिस्सों में भी आगे बढ़ सकता है।
अगले सात दिनों तक गरज-चमक और वज्रपात का अलर्ट
मौसम विभाग ने अगले सात दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक, तेज हवाओं और वज्रपात की चेतावनी जारी की है।वर्तमान में उत्तर राजस्थान से बिहार तक एक मौसमी द्रोणिका (ट्रफ) सक्रिय है, जबकि दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से 27 जून के बाद बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है।
पिछले 24 घंटे में कहां कितनी बारिश हुई
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।
- कुसमी और बस्तर में 3 सेंटीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई।
- बकावंड, बलरामपुर और गीदम में 2 सेंटीमीटर बारिश हुई।
- दौरा कोचली और करपावंड में 1 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
इसके अलावा कई स्थानों पर मेघगर्जन और वज्रपात की घटनाएं भी रिकॉर्ड की गईं। हालांकि अधिकांश जिलों में बारिश की कमी के कारण गर्मी और उमस बनी हुई है।
किसानों की नजर अब मानसून पर
बारिश की कमी से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो कृषि कार्यों पर व्यापक असर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों की उम्मीदें अब 27 जून के बाद सक्रिय होने वाले मानसून पर टिकी हैं।










