बिलासपुर। आरक्षण को लेकर एक अहम याचिका पर हाईकोर्ट न सरकार से जवाब मांगा है। दिव्यांग आरक्षण में अंधत्व और कम दृष्टि वाले दिव्यांगजनों के लिए अलग आरक्षण नहीं दिए जाने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य शासन और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) से जवाब मांगा है। जस्टिस एके प्रसाद की बेंच में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ने वर्तमान आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देते हुए कहा है कि दिव्यांग आरक्षित पदों को एक ही श्रेणी में रखना उचित नहीं है। याचिका में विशेष रूप से अंधत्व और कम दृष्टि वाले दिव्यांगजनों के लिए अलग कोटा निर्धारित करने की मांग की गई है।
एक ही श्रेणी में रखने पर उठे सवाल
दरअसल याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि अंधत्व, कम दृष्टि और अन्य प्रकार की दिव्यांगता को एक ही श्रेणी में रखकर आरक्षण देना दिव्यांग अधिकारों से जुड़े प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
याचिकाकर्ता स्वयं 90 प्रतिशत दृष्टि दिव्यांग हैं और उन्होंने इसी आधार पर मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाया है।याचिका में दिव्यांग अधिकार अधिनियम की धारा 34 का हवाला देते हुए कहा गया है कि अंधत्व और कम दृष्टि वाले दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण का अलग प्रावधान किया जाना चाहिए।
चार सप्ताह में जवाब मांगा
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य शासन और CGPSC को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। हालांकि कोर्ट ने फिलहाल याचिका की ग्राह्यता यानी याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, इस प्रश्न को खुला रखा है।
अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब राज्य शासन और CGPSC की ओर से जवाब दाखिल किया जाएगा। इसके बाद कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई करेगा। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
यदि कोर्ट याचिकाकर्ता की दलीलों से सहमत होता है, तो दिव्यांग आरक्षण में अलग-अलग श्रेणियों के लिए आरक्षण व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं। हालांकि फिलहाल कोर्ट ने इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है।



















