रायपुर। छत्तीसगढ़ में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर अब राज्य सरकार बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी में है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस संबंध में सभी विभागों, संभागीय आयुक्तों, विभागाध्यक्षों, कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को कड़ा निर्देश जारी किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में जाति प्रमाण पत्र को उच्च स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति द्वारा फर्जी, गलत या झूठा पाए जाने के बाद निरस्त किया जा चुका है और संबंधित कर्मचारी को न्यायालय से स्थगन आदेश नहीं मिला है, उनकी सेवाएं तत्काल समाप्त की जाएंगी।
सामान्य प्रशासन विभाग का यह आदेश 11 अगस्त 2026 को जारी हुआ है। आदेश में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के फर्जी या गलत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के मामलों में अब तक की गई कार्रवाई की अद्यतन जानकारी भी तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद तेज हुई कार्रवाई
सरकार की यह कार्रवाई मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की तरफ से विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर की गई घोषणा के अनुरूप बताई गई है। सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुपालन में ऐसे शासकीय सेवकों की सेवाएं तत्काल समाप्त की जानी हैं, जिनके जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा फर्जी या गलत पाए गए हैं।यानी अब उन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की तैयारी है, जिनमें छानबीन समिति का फैसला हो चुका है और जाति प्रमाण पत्र निरस्त किया जा चुका है।
कोर्ट से स्टे नहीं तो तत्काल खत्म होगी नौकरी
सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने आदेश में कार्रवाई की प्रक्रिया भी स्पष्ट कर दी है। जिन सरकारी सेवकों के जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा फर्जी पाए जाने के बाद निरस्त किए जा चुके हैं, यदि ऐसे मामलों में न्यायालय का कोई स्थगन आदेश यानी स्टे नहीं है, तो संबंधित शासकीय विभाग को उनकी सेवाएं अविलंब समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसका मतलब है कि जिन कर्मचारियों के खिलाफ जाति प्रमाण पत्र फर्जी होने का निर्णय हो चुका है और उन्होंने अदालत से राहत नहीं ली है, उनके मामलों में अब विभागीय स्तर पर कार्रवाई में देरी नहीं की जानी है।
सेवा समाप्ति से पहले हाईकोर्ट में कैविएट
सरकार ने कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया को भी मजबूत करने का फैसला लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश के मुताबिक, संबंधित कर्मचारी की सेवा समाप्ति का आदेश जारी करने से पहले शासकीय विभाग को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल करना होगा।कैविएट दाखिल करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि सेवा समाप्ति
Skip to PDF content के आदेश को चुनौती देकर संबंधित कर्मचारी अदालत का रुख करता है, तो सरकार का पक्ष सुने बिना एकतरफा आदेश जारी न हो।
जिन मामलों में स्टे है, उनमें भी होगी समीक्षा
सरकार ने उन कर्मचारियों के मामलों के लिए भी निर्देश जारी किए हैं, जिन्हें अदालत से स्थगन आदेश मिला हुआ है। ऐसे मामलों में तत्काल सेवा समाप्ति के बजाय सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के अनुसार विधिक समीक्षा की जाएगी। साथ ही शासकीय विभागों को संबंधित मामलों में मिले स्थगन आदेश को समाप्त कराने के लिए तत्परता से कार्रवाई करने को कहा गया है।इससे साफ है कि सरकार सभी मामलों में एक जैसी कार्रवाई करने के बजाय कोर्ट के आदेशों की स्थिति के आधार पर आगे बढ़ेगी।
सभी विभागों से मांगी गई कार्रवाई की रिपोर्ट
सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों और अधीनस्थ कार्यालयों से ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की अद्यतन और एकजाई जानकारी तत्काल मांगी है। पत्र में मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग के साथ-साथ आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग को भी भेजी जानी है।
अब लंबित मामलों पर भी बढ़ेगा दबाव
सरकार के इस निर्देश के बाद फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामलों में कार्रवाई तेज होने की संभावना है। खासकर वे मामले जिनमें उच्च स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति पहले ही प्रमाण पत्र को गलत या फर्जी घोषित कर चुकी है और कर्मचारी को अदालत से कोई संरक्षण नहीं मिला है, अब सीधे सेवा समाप्ति की कार्रवाई के दायरे में आएंगे।
वहीं जिन मामलों में न्यायालय से स्टे मिला हुआ है, वहां सरकार उसे समाप्त कराने के लिए कानूनी कार्रवाई करेगी। इस तरह सरकार ने एक तरफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामलों में त्वरित कार्रवाई का रास्ता साफ किया है, तो दूसरी तरफ सेवा समाप्ति से पहले हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल करने की व्यवस्था कर कानूनी चुनौती की स्थिति में अपना पक्ष मजबूत करने की तैयारी भी कर ली है।



















