रायपुर। पेपर लीक पर पूरे देश में हंगामा मचा है। दिल्ली के जंतर-मंतर के बाद रांची में भी छात्रों ने प्रदर्शन से सरकार को हिला दिया है। अब झारखंड में भी पेपर लीक की एक खबर आयी है। दरअसल इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की सेमेस्टर परीक्षा से पहले एंटोमोलॉजी विषय का प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। परीक्षा शुक्रवार सुबह 10 बजे आयोजित होनी थी, लेकिन छात्रों का आरोप है कि प्रश्नपत्र सुबह करीब 8 बजे ही सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा।
पेपर वायरल होने की जानकारी सामने आने के बाद छात्रों में नाराजगी बढ़ गई। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने मामले को उठाते हुए परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए और पूरे प्रकरण की जांच की मांग की।
परीक्षा से दो घंटे पहले वायरल हुआ पेपर
जानकारी के मुताबिक, एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा सुबह 10 बजे से शुरू होनी थी। इससे पहले ही प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई। छात्रों का कहना है कि परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले ही पेपर कई लोगों तक पहुंच चुका था।मामला सामने आने के बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। छात्रों ने मांग की कि पेपर लीक की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
ABVP ने परीक्षा रद्द करने की मांग उठाई
मामले को लेकर ABVP की रायपुर इकाई ने भी मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने वायरल हुए प्रश्नपत्र की घटना को गंभीर बताते हुए परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा आयोजित कराने की मांग की है।ABVP ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।

ABVP की प्रमुख मांगें
• एंटोमोलॉजी की परीक्षा को तत्काल रद्द कर पुनः परीक्षा आयोजित की जाए।
• पेपर वायरल होने के मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
• प्रश्नपत्र लीक मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
छात्रों ने उठाए परीक्षा व्यवस्था पर सवाल
छात्रों का कहना है कि यदि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर पहुंच गया था, तो यह विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था और गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। छात्रों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द स्थिति स्पष्ट करे और यह बताए कि प्रश्नपत्र किस स्तर से बाहर आया।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पेपर लीक होने की आधिकारिक पुष्टि और परीक्षा रद्द करने को लेकर अंतिम निर्णय का इंतजार है। मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल प्रश्नपत्र वास्तविक था या नहीं और वह सोशल मीडिया तक कैसे पहुंचा।



















