दुर्ग। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के पेपर लीक मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। प्राचार्य और प्रोफेसर को बर्खास्त कर दिया गया है। पेपर लीक मामले में संलिप्तता व लापरवाही मामले में ये बड़ा एक्शन हुआ है। मामले की प्रारंभिक जांच के बाद दुर्ग के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज प्रबंधन ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रश्नपत्र लीक प्रकरण में कॉलेज की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में लापरवाही बरतने के आरोप में लंबे समय से पदस्थ प्राचार्य डॉ. एके दुबे को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।
वहीं, मामले में गिरफ्तार कॉलेज के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया को भी सेवा से हटा दिया गया है।पुलिस जांच में योगेश सोनकेसरिया पर प्रश्नपत्र लीक करने में अहम भूमिका निभाने और कथित तौर पर मास्टरमाइंड होने का आरोप है। IGKV पेपर लीक मामले में दुर्ग के भारती कॉलेज के असिस्टेंट लेक्चरर समेत कुल छह आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। सभी आरोपियों के खिलाफ रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र में FIR दर्ज की गई है।
पेपर लीक मामले में प्राचार्य पर भी कार्रवाई
दरअसल प्रश्नपत्र लीक होने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने पूरे मामले में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी में हुई कथित लापरवाही को गंभीरता से लिया। जांच में सामने आए तथ्यों और कॉलेज स्तर पर हुई कार्रवाई के आधार पर प्राचार्य डॉ. एके दुबे को बर्खास्त करने का फैसला लिया गया।कॉलेज प्रबंधन की ओर से यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है, जब पेपर लीक मामले की पुलिस जांच जारी है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
2019 से भारती कॉलेज से जुड़ा था योगेश सोनकेसरिया
कालेज प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के सिवनी निवासी योगेश सोनकेसरिया वर्ष 2019 से भारती विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ था। करीब एक साल पहले, यानी 2025 से उसे विश्वविद्यालय से प्रश्नपत्र लाने और ले जाने की जिम्मेदारी दी गई थी।आरोप है कि प्रश्नपत्रों की आवाजाही की इसी जिम्मेदारी का फायदा उठाकर उसने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बाहर पहुंचाया। पुलिस ने मामले में उसे गिरफ्तार किया है और उससे जुड़े अन्य आरोपों की जांच की जा रही है।
पेपर लीक के बाद दो परीक्षाएं रद्द
IGKV पेपर लीक मामले का असर कृषि छात्रों की परीक्षाओं पर भी पड़ा है। 7 अगस्त को आयोजित BSc कृषि प्रथम वर्ष की प्लांट पैथोलॉजी परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इस परीक्षा का प्रश्नपत्र भी लीक हुआ था।इससे पहले 20 अगस्त को BSc कृषि द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा भी रद्द की गई थी। अब दोनों परीक्षाएं सितंबर के पहले सप्ताह में दोबारा आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है।परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों में भी नाराजगी है। छात्रों की परेशानी को देखते हुए विश्वविद्यालय की ओर से दोबारा परीक्षा कराने की तैयारी की जा रही है।
छात्रों ने पेपर पहले मिलने का किया दावा
पेपर लीक मामले में गिरफ्तारियों के बाद कुछ छात्रों ने प्रश्नपत्र लीक होने को लेकर गंभीर दावे किए हैं। कुछ कृषि छात्रों ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि कथित तौर पर प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले नहीं, बल्कि करीब एक दिन पहले ही कुछ छात्रों तक पहुंच जाता था।
छात्रों का दावा है कि कई बार प्रश्नपत्र सुबह करीब 11 बजे तक उपलब्ध हो जाता था। उनके अनुसार, मामला केवल एक विषय के प्रश्नपत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि सेमेस्टर के कई विषयों के प्रश्नपत्र PDF के रूप में छात्रों के बीच शेयर किए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, इन दावों की पुलिस जांच में अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन दावों को जांच पूरी होने तक आरोप और दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।
5 हजार तक में पेपर मिलने का दावा
कुछ छात्रों ने यह भी दावा किया है कि कथित तौर पर एक प्रश्नपत्र के लिए करीब 5 हजार रुपये तक लिए जाते थे। बताया गया कि कई छात्र मिलकर रकम जुटाते थे और राशि पूरी होने के बाद प्रश्नपत्र की PDF व्हाट्सऐप के माध्यम से अन्य छात्रों तक पहुंचाई जाती थी।हालांकि, इस पूरे दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। पुलिस जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि प्रश्नपत्र लीक करने में कौन-कौन लोग शामिल थे और लीक हुए प्रश्नपत्र को छात्रों तक किस माध्यम से पहुंचाया गया।
जांच के दायरे में कई पहलू
IGKV पेपर लीक मामले में पुलिस आरोपियों की भूमिका, प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था, उसे लाने-ले जाने की प्रक्रिया और कथित तौर पर प्रश्नपत्र के प्रसार से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।भारती कॉलेज प्रबंधन की कार्रवाई के बाद अब मामले में आगे की जांच और संभावित कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। पेपर लीक की पूरी श्रृंखला और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।



















