School Education News: देश में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर संसद में बेहद चिंताजनक आंकड़े आये हैं। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत में 1,00,843 स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है। इन आंकड़ों में छत्तीसगढ का भी नाम है। जो आंकड़े ससंद में दिये गये हैं। इनमें सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूल सभी शामिल हैं। सबसे ज्यादा ऐसे स्कूल आंध्र प्रदेश में हैं, जबकि झारखंड दूसरे स्थान पर है।
हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात (Student-Teacher Ratio) तय मानकों के भीतर है, लेकिन राज्यवार आंकड़े बताते हैं कि कई इलाकों में शिक्षकों की भारी कमी अब भी बनी हुई है।
आंध्र प्रदेश पहले, झारखंड दूसरे स्थान पर
UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार देश में एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या इस प्रकार है—
राज्य एक शिक्षक वाले स्कूल
आंध्र प्रदेश 16,357
झारखंड 9,827
महाराष्ट्र 9,269
कर्नाटक 8,042
उत्तर प्रदेश 7,874
राजस्थान 7,200
पश्चिम बंगाल 6,769
इन सात राज्यों में ही देश के लगभग 65 प्रतिशत एकल-शिक्षक (Single Teacher) स्कूल मौजूद हैं।
अन्य राज्यों की स्थिति भी चिंताजनक
इन राज्यों में भी बड़ी संख्या में स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं—
• तेलंगाना – 4,793
• तमिलनाडु – 3,957
• असम – 3,159
• हिमाचल प्रदेश – 3,128
• उत्तराखंड – 2,655
• छत्तीसगढ़ – 2,461
सबसे बेहतर स्थिति वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश
कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसे स्कूलों की संख्या बेहद कम है—
• केरल – 67
• नागालैंड – 35
• सिक्किम – 31
• लद्दाख – 28
• दिल्ली – 7
• अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह – 1
राष्ट्रीय छात्र-शिक्षक अनुपात मानकों के भीतर
शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत देश का औसत छात्र-शिक्षक अनुपात निर्धारित सीमा के भीतर है—
• प्राथमिक स्तर: 19 छात्रों पर 1 शिक्षक
• उच्च प्राथमिक: 17 छात्रों पर 1 शिक्षक
• माध्यमिक: 15 छात्रों पर 1 शिक्षक
• उच्च माध्यमिक: 23 छात्रों पर 1 शिक्षक
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय औसत वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता, क्योंकि कई ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं को पढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य और मिड-डे मील जैसी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं।
राज्यसभा में जयंत चौधरी ने दी जानकारी
ये आंकड़े शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने राज्यसभा में शिक्षकों के रिक्त पदों से जुड़े प्रश्न के लिखित उत्तर में साझा किए। हालांकि प्रश्न सरकारी स्कूलों से संबंधित था, लेकिन सरकार ने एक शिक्षक वाले स्कूलों के आंकड़ों में सभी प्रकार के प्रबंधन वाले स्कूलों को शामिल किया।
सरकार ने बताईं खाली पदों की वजहें
केंद्र सरकार के अनुसार शिक्षकों की भर्ती और उनकी तैनाती का अधिकार राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास है। शिक्षकों के पद खाली रहने के पीछे कई कारण बताए गए हैं—
• शिक्षकों का सेवानिवृत्त होना
• शिक्षकों का इस्तीफा देना
• नए पदों का सृजन और पुनर्गठन
• ग्रामीण, आदिवासी और आकांक्षी जिलों में नामांकन में बदलाव
सरकार ने कहा कि राज्यों को नियमित रूप से पारदर्शी और योग्यता आधारित भर्ती प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी जाती है। साथ ही समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।


















