बिलासपुर। नौकरी के साथ नियमित रूप से एलएलबी की पढ़ाई करने की योजना बना रहे सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए अहम खबर है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने विधि शिक्षा को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। BCI के नए नियमों के तहत एलएलबी को पूर्णकालिक पाठ्यक्रम के रूप में संचालित करना होगा। ऐसे में नौकरी के साथ शाम, सप्ताहांत या शिफ्ट में एलएलबी की पढ़ाई करने की व्यवस्था पर रोक लग सकती है। बीसीआई के निर्देशों के मुताबिक कानून की पढ़ाई के लिए प्रतिदिन कम से कम 5 घंटे और सप्ताह में 30 घंटे का शैक्षणिक समय निर्धारित है। इसका पालन सभी विधि शिक्षण संस्थानों के लिए अनिवार्य होगा।
नौकरी के साथ LLB करना अब आसान नहीं
बीसीआई की तरफ से जारी नए निर्देशों का सीधा असर उन पूर्णकालिक अधिकारी-कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो अपनी नियमित सरकारी या निजी नौकरी के साथ एलएलबी में प्रवेश लेना चाहते हैं। पहले कई मामलों में डिप्टी कलेक्टर, पुलिस अधिकारी, रेलवे और एसईसीएल समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों के एलएलबी करने के उदाहरण सामने आते रहे हैं। हालांकि, बीसीआई के नए निर्देशों के बाद नियमित नौकरी के साथ पूर्णकालिक एलएलबी पाठ्यक्रम में शामिल होना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो जाएगा।
शाम और शिफ्ट की कक्षाओं पर सख्ती
बीसीआई की ओर से विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भेजे गए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल निर्धारित नियमों के अनुरूप नियमित विधि शिक्षा को ही मान्यता दी जाएगी।बिना अनुमति संचालित हो रही शिफ्ट कक्षाओं, पार्ट-टाइम व्यवस्था और फर्जी उपस्थिति जैसी व्यवस्थाओं पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य विधि शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है।
छह सप्ताह में होगा विधि संस्थानों का निरीक्षण
बीसीआई ने विश्वविद्यालयों को सभी विधि शिक्षण केंद्रों का व्यापक भौतिक निरीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। यह प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी।निरीक्षण के दौरान कक्षाओं, शिक्षकों, बायोमेट्रिक सिस्टम, उपस्थिति रजिस्टर, पुस्तकालय और मूट कोर्ट जैसी सुविधाओं की जांच की जाएगी।
इसके अलावा निरीक्षण रिपोर्ट के साथ जियो-टैग तस्वीरें भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।विश्वविद्यालयों को इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने और उसका नाम, पद, मोबाइल नंबर तथा ई-मेल की जानकारी बीसीआई को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई
बीसीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल किसी विश्वविद्यालय से संबद्धता होना विधि पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। Rules of Legal Education, 2008 के नियम 14 के तहत बीसीआई की आवश्यक स्वीकृति और संबंधित रिपोर्ट की प्रक्रिया का पालन करना होगा। बिना मान्यता या नियमों के विपरीत विधि पाठ्यक्रम संचालित पाए जाने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
तीन श्रेणियों में बांटे जाएंगे विधि संस्थान
निरीक्षण के बाद विधि शिक्षण संस्थानों को उनकी स्थिति के आधार पर तीन श्रेणियों में रखा जाएगा।
पहली श्रेणी में वे संस्थान होंगे जो बीसीआई के सभी निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।
दूसरी श्रेणी में ऐसे संस्थान रखे जाएंगे, जिनमें कुछ कमियां हैं और जिन्हें तत्काल सुधार के जरिए दूर किया जा सकता है।
वहीं तीसरी श्रेणी में गंभीर कमियों वाले संस्थान शामिल होंगे। ऐसे संस्थानों के खिलाफ संबद्धता निलंबित करने, नवीनीकरण रोकने या संबद्धता वापस लेने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ी सख्ती
विधि शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केआर सुदर्शन बनाम बार काउंसिल ऑफ तमिलनाडु एंड पांडिचेरी मामले की सुनवाई के दौरान गंभीर मौखिक टिप्पणियां सामने आई थीं। इसके बाद बीसीआई ने विधि शिक्षण संस्थानों में नियमों के पालन को लेकर निगरानी और सख्ती बढ़ाई है।बीसीआई का जोर इस बात पर है कि एलएलबी जैसे पेशेवर पाठ्यक्रम को केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि छात्रों को निर्धारित समय, नियमित कक्षाओं और आवश्यक शैक्षणिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण कानूनी शिक्षा मिले।

























