बिलासपुर। राज्यपाल के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट और कार्टून साझा मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दो आरोपियों को सशर्त राहत दी है। आरोपियों को सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म से इस कार्टून को हटाना होगा। इससे पहले इस मामले में आरोपी प्रणव कलिता और लक्ष्मीधर राजबोंगशी ने अदालत के समक्ष अपने कृत्य पर माफी मांगी। इसके बाद हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए आपत्तिजनक पोस्ट को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया है।
राज्यपाल से जुड़ा आपत्तिजनक कार्टून किया था पोस्ट
दरअसल ये पूरा मामला राज्यपाल से संबंधित एक आपत्तिजनक कार्टून को सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने से जुड़ा है। आरोप है कि दोनों आरोपियों ने सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर यह सामग्री साझा की थी। इस मामले में लोक भवन के अधिकारियों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज की थी।दोनों आरोपी गुवाहाटी के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद अदालत में चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी।
FIR रद्द करने हाईकोर्ट पहुंचे थे आरोपी
कार्टून को लेकर हुई शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था। जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई के बाद आरोपियों ने FIR को रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिका पर सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों की ओर से अपने कृत्य के लिए माफी मांगी गई।अदालत के समक्ष आरोपियों ने आपत्तिजनक सामग्री को सोशल मीडिया से हटाने की बात भी कही। मामले की परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने दोनों को सशर्त राहत दी।
सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से पोस्ट हटाने का निर्देश
हाईकोर्ट ने आरोपियों को निर्देश दिया कि राज्यपाल से संबंधित आपत्तिजनक पोस्ट और कार्टून को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से डिलीट किया जाए। अदालत की शर्तों का पालन करना आरोपियों के लिए राहत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।मामले में पुलिस पहले ही जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद आरोपियों को अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा।
शिकायत के बाद दर्ज हुई थी FIR
जानकारी के मुताबिक, लोक भवन के अधिकारियों की शिकायत के बाद पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर मामला दर्ज किया था। शिकायत में राज्यपाल से संबंधित पोस्ट और कार्टून को आपत्तिजनक बताया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए चार्जशीट दाखिल की।हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोपियों ने FIR को रद्द करने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान उनकी ओर से माफी मांगने और आपत्तिजनक सामग्री हटाने की बात सामने आई, जिसके बाद अदालत ने सशर्त राहत प्रदान की।
























