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शिक्षक को जेल: महासमुंद में छात्रा से गंदी हरकत करने वाले टीचर को जेल, पॉक्सो एक्ट में 5 साल की सजा

June 27, 2026 5:32 AM
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Mahasamund Teacher POCSO Case: छात्रा के साथ गंदी हरकत करने वाले शिक्षक को कोर्ट ने सजा सुनायी है। पाक्सो एक्ट में शिक्षक को 5 साल जेल की सजा मिली है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में नाबालिग छात्रा के साथ अशोभनीय हरकत और बैड टच करने के मामले में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने आरोपी शिक्षक को दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई हैै। अदालत ने माना कि आरोपी ने शिक्षक होने के अपने पद और गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते का गंभीर दुरुपयोग किया।

पॉक्सो एक्ट के तहत पांच साल की सजा

अपर सत्र न्यायाधीश मोनिका जायसवाल की फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने आरोपी शिक्षक गणेशराम चंद्राकर को पॉक्सो अधिनियम की धारा 10 के तहत दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि आरोपी जुर्माना जमा नहीं करता है, तो उसे तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

बीएनएस की धारा 74 में भी दोषी

अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74 के तहत भी दोषी ठहराया। इस मामले में उसे तीन वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में तीन माह की अतिरिक्त कैद का प्रावधान भी रखा गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

गणित की कक्षा के दौरान हुई थी घटना

अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 8 जनवरी 2025 की है। पीड़ित छात्रा ने महासमुंद थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। छात्रा ने आरोप लगाया था कि गणित की कक्षा के दौरान शिक्षक ने कथित तौर पर नशे की हालत में उसके साथ अनुचित स्पर्श (बैड टच) किया।

पुलिस जांच के बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर आरोपी शिक्षक के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

गुरु-शिष्य के रिश्ते पर अदालत की सख्त टिप्पणी

फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि शिक्षक का दायित्व विद्यार्थियों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना होता है। ऐसे में आरोपी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग गंभीर अपराध है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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