नंदन नीलेकणी कौन हैं? आधार के शिल्पकार, इंफोसिस के सह-संस्थापक और अब परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के प्रमुख | पूरी जीवनी
Nandan Nilekani Biography in Hindi: नंदन नीलेकणी भारत के सबसे प्रभावशाली आईटी उद्यमियों में से एक हैं। वे इंफोसिस (Infosys) के सह-संस्थापक, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के पहले अध्यक्ष और आधार (Aadhaar) परियोजना के प्रमुख वास्तुकार माने जाते हैं। अब पेपर लीक के विवादों के बीच उन्हें 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए गठित हाई पावर टास्क फोर्स का प्रमुख बनाया है।
आइए जानते हैं नंदन नीलेकणी का जीवन, शिक्षा, करियर, उपलब्धियां और भारत के डिजिटल परिवर्तन में उनके योगदान के बारे में विस्तार से।
नंदन नीलेकणी कौन हैं?
भारत में जब भी डिजिटल क्रांति, आधार कार्ड, डिजिटल गवर्नेंस और आईटी सेक्टर की बात होती है, तो नंदन नीलेकणी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। वे सिर्फ एक सफल उद्योगपति नहीं, बल्कि एक ऐसे विजनरी हैं जिन्होंने तकनीक के जरिए करोड़ों भारतीयों के जीवन को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इंफोसिस को वैश्विक पहचान दिलाने से लेकर आधार जैसी दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान परियोजना का नेतृत्व करने तक, उनका सफर भारतीय आईटी इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।अब उन्हें देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। खुद प्रधानमंत्री ने वीडियो जारी कर उनके नाम का ऐलान किया।
नंदन नीलेकणी का जीवन परिचय (Profile)
विवरण जानकारी
पूरा नाम नंदन मोहनराव नीलेकणी
जन्म। 2 जून 1955
जन्म स्थान बेंगलुरु (तत्कालीन मैसूर राज्य)
आयु 71 वर्ष (2026)
शिक्षा IIT Bombay (B.Tech, Engineering)
पेशा आईटी उद्योगपति, उद्यमी
कंपनी Infosys
वर्तमान पद। Non-Executive Chairman, Infosys
प्रमुख पहचान Aadhaar, UIDAI, Digital India
सम्मान पद्म भूषण (2006)
शुरुआती जीवन
नंदन नीलेकणी का जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ। उनका परिवार मूल रूप से कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के सिरसी से संबंध रखता है।उनके पिता मोहन राव नीलेकणी टेक्सटाइल उद्योग में वरिष्ठ पद पर कार्यरत थे। बचपन से ही घर में शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक सोच का माहौल था, जिसका प्रभाव नंदन के व्यक्तित्व पर भी पड़ा। डिजिटल क्षेत्र में उनके नाम कई बड़ी उपलब्धियां दर्ज है।
शिक्षा
नंदन नीलेकणी ने
• Bishop Cotton Boys School, Bengaluru
• St. Joseph High School
• Dharwad PUC से पढ़ाई की।
इसके बाद उन्होंने IIT Bombay से वर्ष 1978 में Electrical Engineering में B.Tech किया।दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने बिना किसी विशेष कोचिंग के देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश प्राप्त किया।
नौकरी से स्टार्टअप तक का सफर
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने Patni Computer Systems में नौकरी शुरू की।
यहीं उनकी मुलाकात हुई एन.आर. नारायण मूर्ति से।
यह मुलाकात भारतीय आईटी सेक्टर के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में बदल गई।
कैसे बनी Infosys?
1981 में नंदन नीलेकणी, नारायण मूर्ति और छह अन्य साथियों ने मिलकर मात्र सीमित पूंजी से Infosys की शुरुआत की।
उस समय भारत में आईटी उद्योग लगभग न के बराबर था।
शुरुआती 10 वर्षों तक कंपनी ने संघर्ष किया।
लेकिन 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद Infosys ने वैश्विक बाजार में तेजी से पहचान बनानी शुरू कर दी।
Infosys में निभाई अहम भूमिका
नंदन नीलेकणी ने कंपनी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
प्रमुख पद
• 1981 – Co-Founder
• 2002 – CEO एवं Managing Director
• 2007 – Co-Chairman
• 2017 – Non-Executive Chairman
उनके कार्यकाल में Infosys दुनिया की अग्रणी आईटी कंपनियों में शामिल हुई।
दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान परियोजना – आधार
साल 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उन्हें UIDAI का पहला अध्यक्ष बनाया। यहीं से शुरू हुआ भारत की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान परियोजना Aadhaar।
आज आधार के जरिए—
• सरकारी योजनाओं का लाभ
• DBT
• गैस सब्सिडी
• बैंकिंग
• e-KYC
• डिजिटल पहचान
• पेंशन
• छात्रवृत्ति
जैसी सेवाएं करोड़ों लोगों तक पहुंच रही हैं।आज भारत की 130 करोड़ से अधिक आबादी के पास आधार पहचान उपलब्ध है।
डिजिटल इंडिया की मजबूत नींव
हालांकि UPI, FASTag और GST जैसी प्रणालियां कई संस्थाओं और विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम हैं, लेकिन नंदन नीलेकणी को भारत के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे (Digital Public Infrastructure) के प्रमुख विचारकों में गिना जाता है। आधार आधारित डिजिटल पहचान ने इन सेवाओं के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार किया।
परीक्षा सुधार की नई जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2026 में घोषणा की कि देश में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए हाई पावर टास्क फोर्स बनाई जाएगी।
इस टास्क फोर्स का नेतृत्व नंदन नीलेकणी करेंगे।
कमेटी निम्न बिंदुओं पर सुझाव देगी—
• पेपर लीक रोकना
• AI आधारित निगरानी
• डिजिटल परीक्षा प्रणाली
• सुरक्षित प्रश्नपत्र वितरण
• साइबर सुरक्षा
• परीक्षा प्रबंधन में तकनीक का उपयोग
राजनीति में भी आजमाया हाथ
2014 में नंदन नीलेकणी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था।
हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली।
इसके बाद वे सक्रिय राजनीति से लगभग दूर रहे और तकनीकी एवं सार्वजनिक नीति से जुड़े कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया।
नंदन नीलेकणी की प्रमुख उपलब्धियां
✔ Infosys के सह-संस्थापक
✔ दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली Aadhaar के निर्माता समूह का नेतृत्व
✔ UIDAI के पहले चेयरमैन
✔ पद्म भूषण सम्मान
✔ भारत में डिजिटल गवर्नेंस को नई दिशा
✔ डिजिटल सार्वजनिक ढांचे (Digital Public Infrastructure) के प्रमुख समर्थक
✔ परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के प्रमुख
नंदन नीलेकणी की सफलता से क्या सीख मिलती है?
उनका जीवन बताता है कि—
• शिक्षा सबसे बड़ी पूंजी है।
• तकनीक समाज बदल सकती है।
• बड़े बदलाव केवल सरकार नहीं, विशेषज्ञ भी ला सकते हैं।
• निजी क्षेत्र का अनुभव सार्वजनिक व्यवस्था को मजबूत कर सकता है।
टाइमलाइन
1955 – जन्म
1978 – IIT Bombay से इंजीनियरिंग
1981 – Infosys की स्थापना
2002 – CEO बने
2006 – पद्म भूषण
2009 – UIDAI के पहले अध्यक्ष
2014 – सक्रिय सार्वजनिक जीवन का नया चरण
2017 – Infosys के Non-Executive Chairman
2026 – परीक्षा सुधार हाई पावर टास्क फोर्स के प्रमुख
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
नंदन नीलेकणी कौन हैं?
वे इंफोसिस के सह-संस्थापक, आईटी उद्योगपति और UIDAI के पहले अध्यक्ष हैं।
नंदन नीलेकणी की उम्र कितनी है?
वर्ष 2026 के अनुसार उनकी आयु 71 वर्ष है।
नंदन नीलेकणी ने कौन-सी पढ़ाई की है?
उन्होंने IIT Bombay से Electrical Engineering में B.Tech किया।
क्या नंदन नीलेकणी आधार कार्ड के जनक हैं?
उन्होंने UIDAI के पहले अध्यक्ष के रूप में आधार परियोजना का नेतृत्व किया और इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नंदन नीलेकणी को कौन-सा पुरस्कार मिला है?
उन्हें वर्ष 2006 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
क्या नंदन नीलेकणी राजनीति में रहे हैं?
उन्होंने 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन बाद में सक्रिय राजनीति से दूर हो गए।
परीक्षा सुधार समिति में उनकी क्या भूमिका है?
वे केंद्र सरकार की परीक्षा सुधार हाई पावर टास्क फोर्स का नेतृत्व कर रहे हैं।
नंदन नीलेकणी का सफर केवल एक सफल उद्योगपति बनने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस व्यक्ति की कहानी है जिसने भारत को डिजिटल युग में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इंफोसिस की स्थापना से लेकर आधार जैसी ऐतिहासिक परियोजना और अब परीक्षा सुधार जैसे राष्ट्रीय दायित्व तक, उनकी यात्रा नवाचार, नेतृत्व और सार्वजनिक सेवा का उदाहरण है।


















