रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमानत गैंग का पर्दाफाश हुआ है। महिलाओं का ये गैंग फर्जी तरीके से जमानत देने का धंधा किया करता था। राजधानी रायपुर में एनडीपीएस (NDPS) मामलों में फर्जी जमानत दिलाने वाले रैकेट के खुलासे के बाद पुलिस की सक्रियता बढ़ गयी है। विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) किरण थवाईत के आदेश पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने तीन महिला जमानतदारों के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं।
आरोप है कि महिलाओं ने ऋण पुस्तिकाओं में हेरफेर कर न्यायालय की सील और पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर वाले पन्ने निकाल दिए और उसी दस्तावेज का बार-बार इस्तेमाल कर अलग-अलग आरोपितों की जमानत कराई।
एक ही ऋण पुस्तिका से कई आरोपितों की कराई जमानत
जांच के दौरान ये सामने आया कि पहले मामले में मीना बाई पति रमेश कुमार को आरोपी बनाया गया है। न्यायालय के अनुसार, विशेष दांडिक प्रकरण में आरोपी सरजन कुमार विश्वकर्मा की जमानत के लिए मीना बाई ने ऋण पुस्तिका प्रस्तुत की थी। जांच में सामने आया कि मीना बाई वर्ष 2024, 2025 और 2026 के कई एनडीपीएस मामलों में भी इसी ऋण पुस्तिका के आधार पर जमानतदार बन चुकी थी।
कमाल की बात ये है कि जिन मामलों में वह जमानतदार बनी, उनमें मुकेश गुप्ता, अर्पित लाल मरकाम, कुसुम हिंदुजा, रहीम सोनवानी, मनमोहन सिंह संधू, राकेश कुमार, कृष्ण गोपाल अग्रवाल और शेख आरिफ सहित कई आरोपित शामिल हैं।
यही नहीं जांच के दौरान यह भी पाया गया कि ऋण पुस्तिका के वे पृष्ठ, जिन पर न्यायालय की सील और न्यायाधीश के हस्ताक्षर होने चाहिए थे, गायब थे। न्यायालय के समक्ष मीना बाई ने भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने की बात कहते हुए दस्तावेजों में हेरफेर की बात स्वीकार कर ली।
दो अन्य महिला जमानतदारों पर भी दर्ज हुई एफआईआर
वहीं एक अन्य मामले में सरस्वती बाई सोनी और सुनीता देवी राजपूत के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।न्यायालय के अनुसार, आरोपी दिलीप और सरजन कुमार विश्वकर्मा की जमानत के लिए दोनों महिलाओं ने अलग-अलग ऋण पुस्तिकाएं प्रस्तुत की थीं।
जांच में यह भी पता चला कि सुनीता देवी इससे पहले जसप्रीत कौर उर्फ बाबी की जमानतदार बन चुकी थी, जबकि सरस्वती बाई सोनी अज्जू उर्फ अजय नामक आरोपी की जमानत के लिए न्यायालय में उपस्थित हुई थी।इन दोनों मामलों में भी प्रस्तुत ऋण पुस्तिकाओं से न्यायालय की सील और न्यायाधीश के हस्ताक्षर वाले पृष्ठ गायब मिले। पूछताछ के दौरान दोनों महिलाओं ने भी न्यायालय से माफी मांगते हुए दस्तावेजों में हेराफेरी करना स्वीकार किया।
न्यायिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ का गंभीर मामला
विशेष न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि तीनों महिला जमानतदार बार-बार ऋण पुस्तिका से न्यायालय की सील और हस्ताक्षरयुक्त पन्ने निकालकर नष्ट कर देती थीं। इसके बाद उसी दस्तावेज का उपयोग अलग-अलग एनडीपीएस मामलों में जमानत दिलाने के लिए किया जाता था।
अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ और फर्जी जमानत दिलाने का गंभीर अपराध माना है। न्यायालय के आदेश के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने तीनों आरोपित महिलाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस यह भी पता लगाएगी कि इस पूरे फर्जी जमानत रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने मामलों में इसी तरीके से जमानत हासिल की गई।



















