सुकमा। जंगल और दुर्गम रास्तों के बीच देश की सुरक्षा में तैनात जवानों की पहचान सिर्फ उनकी वर्दी और कंधे पर टंगी बंदूक से नहीं होती। कई बार यही वर्दी इंसानियत का ऐसा चेहरा सामने लाती है, जिसे देखकर दिल भर आता है। सुकमा में स्वतंत्रता दिवस की ड्यूटी निभाकर लौट रहे डीआरजी गोल्फ टीम के जवानों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया।
भीमापुरम में जवानों की नजर एक मरीज पर पड़ी, जिसे परिजन चारपाई पर लेकर जा रहे थे। रास्ता मुश्किल था और अस्पताल तक पहुंचना आसान नहीं था। जवानों ने हालात देखे तो बिना किसी औपचारिकता और बिना एक पल गंवाए मदद के लिए आगे बढ़ गए।
जिस कंधे पर थी बंदूक, उसी ने उठाई जिंदगी
देश की सुरक्षा के लिए जिस कंधे पर जवान बंदूक उठाते हैं, उसी कंधे पर उन्होंने उस दिन एक जिंदगी की जिम्मेदारी उठा ली।
जवानों ने मरीज को चारपाई समेत अपने कंधों पर उठाया और पैदल चलकर सीआरपीएफ हॉस्पिटल, रायगुड़ा कैंप तक पहुंचाया। यह सिर्फ किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाने की घटना नहीं थी, बल्कि उस भरोसे की तस्वीर थी, जो वर्दी और आम इंसान के बीच कायम होता है।
दुर्गम इलाकों में जहां कई बार सड़क और परिवहन की सुविधा सीमित होती है, वहां किसी जरूरतमंद के लिए कुछ कदम की मदद भी बेहद मायने रखती है। जवानों ने उस पल यही समझा कि उनकी ड्यूटी सिर्फ सीमा, जंगल या सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के वक्त किसी इंसान के साथ खड़े होना भी उतना ही जरूरी है।
स्वतंत्रता दिवस की ड्यूटी के बाद सामने आई इंसानियत
खास बात यह है कि जवान स्वतंत्रता दिवस की ड्यूटी निभाकर लौट रहे थे। दिनभर देश की आजादी और सुरक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद जब उन्होंने एक मरीज को मदद की जरूरत में देखा, तो थकान को पीछे छोड़ दिया।
उन्होंने यह नहीं देखा कि सामने कौन है, किस गांव से है या रास्ता कितना लंबा है। उन्होंने सिर्फ इतना देखा कि एक इंसान को मदद चाहिए।
वर्दी का यह चेहरा लंबे समय तक याद रहेगा
सुकमा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा बलों के जवानों की जिम्मेदारी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। लेकिन इस घटना ने उनकी भूमिका का एक और पहलू सामने रखा है—सुरक्षा के साथ संवेदना और कर्तव्य के साथ मानवता।
मरीज को कंधे पर उठाकर अस्पताल तक पहुंचाते जवानों की यह तस्वीर शायद किसी बड़े अभियान का हिस्सा नहीं थी, लेकिन इसका संदेश बहुत बड़ा है।
कंधे पर बंदूक लेकर देश की रक्षा करने वाले इन जवानों ने उसी कंधे पर एक जिंदगी का भार उठाकर बता दिया कि असली वर्दी वही है, जिसमें ताकत के साथ संवेदनशीलता भी हो।



















