Teacher Transfer। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में शनिवार को जारी शिक्षकों की बड़ी तबादला सूची ने प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है। तबादला सूची जारी होने के बाद जहां शिक्षक संगठनों और शिक्षा जगत में प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अब इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर तबादले के नाम पर वसूली और ‘ट्रांसफर उद्योग’ चलाने का आरोप लगाया है। इसके जवाब में भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस के कार्यकाल पर पलटवार करते हुए कहा कि तबादले जरूरत और आवेदन के आधार पर किए गए हैं।
तबादला बैन के बीच शिक्षकों की बंपर ट्रांसफर लिस्ट पर सवाल
शिक्षा विभाग की ओर से शनिवार को जारी सूची में बड़ी संख्या में शिक्षकों के तबादले किए गए हैं। हालांकि, इस सूची को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि तबादला प्रतिबंधित होने के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर तबादले किस प्रक्रिया के तहत किए गए?
शिक्षक वर्ग के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि जब सामान्य तौर पर तबादले के लिए आवेदन की प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थी, तो इन शिक्षकों ने आवेदन कहां और किस स्तर पर जमा किए। तबादले के लिए क्या मापदंड तय किए गए और किन परिस्थितियों में इन आवेदनों पर निर्णय लिया गया, इसे लेकर भी स्पष्टता की मांग उठ रही है।
स्कूल आवंटित नहीं, DEO तय करेंगे पोस्टिंग
जारी तबादला सूची को लेकर एक और बड़ा सवाल स्कूल आवंटन को लेकर है। सूची में कई शिक्षकों के तबादले का उल्लेख तो है, लेकिन उन्हें किस स्कूल में पदस्थ किया जाएगा, इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
बताया गया है कि संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी यानी DEO शिक्षकों को स्कूल आवंटित करेंगे। इसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि यदि स्कूल आवंटन का अधिकार बाद में तय होना है, तो पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होगी।
शिक्षक वर्ग में यह आशंका भी जताई जा रही है कि यदि स्कूल आवंटन में स्पष्ट और सार्वजनिक मापदंड नहीं हुआ तो पसंदीदा या बेहतर स्कूलों में पोस्टिंग को लेकर लेनदेन की शिकायतें सामने आ सकती हैं। हालांकि, इन आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एक ही स्कूल से दो-दो शिक्षकों का तबादला
तबादला सूची में कुछ ऐसे मामले भी सामने आने की बात कही जा रही है, जहां एक ही स्कूल से दो-दो शिक्षकों का तबादला किया गया है। इसे लेकर भी शिक्षकों के बीच चर्चा तेज है।खास तौर पर तब, जब प्रदेश के कई स्कूल पहले से ही एकल शिक्षक या शिक्षक विहीन होने की समस्या से जूझ रहे हैं। सवाल यह है कि यदि किसी स्कूल में पहले से शिक्षकों की कमी है तो वहां से एक से अधिक शिक्षकों का तबादला किस आधार पर किया गया।
रिक्त पद पोर्टल पर उपलब्ध तो DEO के विकल्प पर क्यों?
तबादला प्रक्रिया को लेकर एक अन्य सवाल यह है कि शिक्षा विभाग के पोर्टल पर विभिन्न स्कूलों में रिक्त पदों की जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद शिक्षकों की पोस्टिंग के लिए DEO के विकल्प पर निर्भरता क्यों रखी गई।
शिक्षक वर्ग का कहना है कि यदि रिक्त पदों की जानकारी पहले से ऑनलाइन उपलब्ध है, तो तबादले के साथ ही संबंधित शिक्षक को रिक्त पद वाले स्कूल में पदस्थ करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती थी। इससे पारदर्शिता बढ़ती और बाद में स्कूल आवंटन को लेकर उठने वाले सवालों से भी बचा जा सकता था।
दीपक बैज बोले- ‘ट्रांसफर उद्योग बनाया जा रहा’
शिक्षकों के तबादले को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि तबादले करने ही थे तो शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले किए जाने चाहिए थे।
बैज ने आरोप लगाया कि अब तबादले की प्रक्रिया का इस्तेमाल वसूली और पैसे कमाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने इसे ‘ट्रांसफर उद्योग’ बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के आरोपों के बाद शिक्षकों के तबादले का मुद्दा सीधे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
पुरंदर मिश्रा का पलटवार- ‘दीपक बैज को पूछकर नहीं होगा ट्रांसफर’
दीपक बैज के आरोपों पर भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में आवश्यकता थी और आवेदन आए थे, उनका परीक्षण करने के बाद शिक्षा विभाग ने तबादले किए हैं।
पुरंदर मिश्रा ने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि सरकार शिक्षकों के तबादले के लिए दीपक बैज से पूछे। उनके मुताबिक वर्तमान सरकार में आवेदन आने के बाद उसका परीक्षण किया जाता है और उसके आधार पर फैसला लिया जाता है।
‘कांग्रेस के कार्यकाल में इंडस्ट्रीज चलती थीं’
भाजपा विधायक ने पलटवार करते हुए कांग्रेस के कार्यकाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में ‘इंडस्ट्रीज’ चलती थीं, जबकि वर्तमान सरकार में आवेदन प्राप्त होने के बाद उनका परीक्षण कर निर्णय लिया जाता है।
इस बयान के बाद शिक्षकों के तबादले को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक प्रक्रिया से निकलकर सीधे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है।
अब पारदर्शिता पर टिकी नजर
शिक्षकों की तबादला सूची सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि स्कूल आवंटन किस आधार पर होगा और पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रहेगी। इसके अलावा तबादला प्रतिबंध के बीच इतने बड़े पैमाने पर आवेदन किस प्रक्रिया से लिए गए, किन मापदंडों पर तबादले किए गए और एक ही स्कूल से एक से अधिक शिक्षकों के तबादले का आधार क्या रहा, इन सवालों के जवाब भी सामने आना बाकी हैं।
फिलहाल कांग्रेस जहां इसे ‘ट्रांसफर उद्योग’ बता रही है, वहीं भाजपा इसे जरूरत और आवेदन के आधार पर लिया गया प्रशासनिक फैसला बता रही है। आने वाले दिनों में शिक्षा विभाग की ओर से तबादलों की प्रक्रिया और स्कूल आवंटन को लेकर यदि विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आता है, तो इस पूरे विवाद की तस्वीर और साफ हो सकती है।



















