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बिना TET प्रमोशन पर शिक्षकों को राहत की उम्मीद! उत्तराखंड ने दिखाया रास्ता, पहले प्रमोशन फिर TET की मोहलत, पढ़िए बैठक में क्या क्या हुआ

TET की अनिवार्यता के बीच उत्तराखंड में शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET पूरा करने का अवसर देने पर सहमति बनी है। पहले प्रमोशन और बाद में TET की व्यवस्था से छत्तीसगढ़ के शिक्षकों को भी राहत की उम्मीद।

August 12, 2026 11:31 AM
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Teacher Promotion News: देशभर में शिक्षकों की पदोन्नति में TET की अनिवार्यता को लेकर चल रही बहस के बीच उत्तराखंड से सामने आया एक फैसला छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में 11 अगस्त 2026 को हुई बैठक में TET की अनिवार्यता के कारण पदोन्नति में आ रही बाधाओं को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी है। बैठक में इस बात का सुझाव दिया गया कि शिक्षकों को निर्धारित समय-सीमा तक TET की योग्यता पूरी करने का अवसर देते हुए पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

शिक्षा विभाग ने ये भी निर्णय लिया है कि शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर एक कमेटी बनेगी, जिसमें शिक्षक संगठन के भी सदस्य शामिल होंगे। उत्तराखंड के इस निर्णय की चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब छत्तीसगढ़ में भी TET को लेकर शिक्षक पदोन्नति का मामला गरमाया हुआ है। यहां प्राथमिक शाला प्रधान पाठक और मिडिल स्कूल शिक्षक के पदों पर प्रमोशन के लिए TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों और विभाग के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। शिक्षकों का कहना है कि जब TET की योग्यता पूरी करने के लिए समय सीमा उपलब्ध है, तो उस अवधि से पहले ही प्रमोशन रोकना या पदावनति की स्थिति पैदा करना उचित नहीं है।

उत्तराखंड में क्या हुआ?

उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में 11 अगस्त 2026 को निदेशक माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में राजकीय शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक में शिक्षकों की पदोन्नति और लंबे समय से लंबित सेवा संबंधी मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के कार्यवृत्त में TET से जुड़ी पदोन्नति की बाधा का भी उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया कि राजकीय शिक्षक संघ की ओर से LT से प्रवक्ता/LT तथा प्रवक्ता से प्रधानाध्यापक पदों पर पदोन्नति के संबंध में उच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के आदेश में TET की निर्धारित समय-सीमा को लेकर चर्चा की गई।

बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि 31 अगस्त 2028 तक TET की योग्यता पूरी करने के लिए शिक्षकों को अवसर दिया जाए और इस अवधि के कारण उनकी पदोन्नति को अभी रोका न जाए।

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पहले प्रमोशन, बाद में TET पूरा करने का मौका

उत्तराखंड में सामने आए इस प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही है कि शिक्षकों को TET की योग्यता पूरी करने के लिए तय समय तक अवसर दिया जाएगा। बैठक के कार्यवृत्त में सुझाव दिया गया है कि निर्धारित तिथि तक TET की पात्रता पूरी नहीं करने पर संबंधित शिक्षक की पदोन्नति स्वतः निरस्त मानी जा सकती है।यानी व्यवस्था का आधार यह बनाया जा रहा है कि TET की अंतिम समय-सीमा समाप्त होने से पहले शिक्षक को प्रमोशन से वंचित नहीं किया जाए।इसी बिंदु को लेकर छत्तीसगढ़ के शिक्षक संगठनों की मांग भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

छत्तीसगढ़ में उलझा है TET और प्रमोशन का मामला

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के रिक्त पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है। विभाग की ओर से यह रुख सामने आया है कि पदोन्नति के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के साथ TET की पात्रता भी पूरी करनी होगी।

प्राथमिक शाला प्रधान पाठक के लिए प्राथमिक स्तर का TET और मिडिल स्कूल शिक्षक के लिए संबंधित स्तर का TET आवश्यक होने की बात कही जा रही है। इसी वजह से पदोन्नति की प्रक्रिया में शामिल कई शिक्षक असमंजस में हैं।

शिक्षकों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि TET की अनिवार्यता पूरी नहीं होने की स्थिति में पदोन्नति प्रभावित होने के साथ-साथ पहले से पदोन्नत शिक्षकों के पद पर बने रहने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

उत्तराखंड के मॉडल से छत्तीसगढ़ के शिक्षकों को क्या उम्मीद?

उत्तराखंड की बैठक में सामने आया रास्ता छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां भी मुख्य विवाद TET की अनिवार्यता और प्रमोशन के समय को लेकर है।शिक्षक संगठनों का तर्क है कि यदि TET की पात्रता पूरी करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक की समय-सीमा उपलब्ध है, तो शिक्षकों को उसी समय तक अपनी योग्यता पूरी करने का अवसर मिलना चाहिए। इस दौरान रिक्त पदों पर उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया नहीं रोकी जानी चाहिए। उत्तराखंड में बैठक के दौरान इसी तरह की व्यवस्था पर सहमति बनना छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के लिए उम्मीद की वजह बन सकता है।

कमेटी भी करेगी पदोन्नति की बाधाओं पर चर्चा

उत्तराखंड की बैठक में केवल TET के मुद्दे पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि पदोन्नति में आ रही अन्य बाधाओं के समाधान के लिए निदेशालय स्तर पर समिति गठित किए जाने पर भी सहमति बनी।इस समिति में शिक्षक संगठन के अध्यक्ष और महामंत्री को भी सदस्य के रूप में शामिल किए जाने की बात कार्यवृत्त में दर्ज है। समिति पदोन्नति से संबंधित बाधाओं का अध्ययन कर उनके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई पर चर्चा करेगी।

अब छत्तीसगढ़ में भी उठ सकती है  मांग

उत्तराखंड के इस घटनाक्रम के बाद छत्तीसगढ़ में शिक्षक संगठन इस मॉडल को आधार बनाकर अपनी मांग और मजबूती से उठा सकते हैं। शिक्षकों का कहना है कि TET की योग्यता को लेकर विभागीय प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए और निर्धारित समय-सीमा से पहले किसी शिक्षक को प्रमोशन के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।हालांकि, उत्तराखंड का यह दस्तावेज छत्तीसगढ़ में स्वतः लागू नहीं होता। छत्तीसगढ़ में इसका लाभ तभी मिल सकेगा, जब राज्य सरकार या स्कूल शिक्षा विभाग इस तरह की व्यवस्था को लेकर अलग से निर्णय अथवा आदेश जारी करे।

फिलहाल उत्तराखंड से सामने आया यह कदम TET को लेकर चल रहे विवाद में एक वैकल्पिक रास्ता जरूर दिखाता है—पहले पदोन्नति का अवसर, निर्धारित समय में TET पूरा करने की शर्त और समय सीमा पूरी नहीं होने पर पदोन्नति निरस्त करने की व्यवस्था।

 

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